रिश्ता.. एक एहसास!
अंकित और नूपुर की कहानी, जहाँ कॉलेज की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदलती है, फिर सात साल की दूरी के बाद दोनों दोबारा मिलते हैं।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
कभी कभी ज़िन्दगी में एक ऐसा इंसान होता है, जिसके बगैर ज़िन्दगी अधूरी रहती है । वह इंसान आपके कहे बिना आपके दिल की बात जान लेता है । उसके बिना आप ज़िन्दगी का तसवुर नहीं कर सकते । पर अचानक वह इंसान आपसे बिछड़ जाता है । तब आपकी ज़िन्दगी कैसी होगी, इसका अंदाज़ा वही लगा सकता है, जो इस दर्द से गुज़रा हुवा हो । ज़िन्दगी के इसी दोराहे से ग़िज़ारते हुवे अंकित और नूपुर ने इस दर्द भरे पहलु को महसूस किया था ।
रिश्ता.. एक एहसास!
अंकित और नूपुर दोनों ही बहुत अच्छे दोस्त थे और उनकी दोस्ती पूरे कॉलेज में मशहूर थी। लेकिन दोनों की दोस्ती ने कब प्यार का रंग ले लिया इन दोनों को भी पता नहीं चला। पूरे कॉलेज में इन दोनों के प्यार के चर्चे आम थे और ये कपल एक आइडियल कपल था जिनके बीच में बहुत ज्यादा अंडरस्टैंडिंग थी। अंकित और नूपुर दोनों ही एक दूसरे की बातों को बिना कहे समझ लेते थे और यही वजह थी कि दोनों का रिश्ता हर गुजरते दिन गहरा होता जा रहा था।
इन दोनों ने अपनी फैमिली में भी अपने रिलेशन के बारे में बता रखा था और दोनों के घर वाले एजुकेटेड थे और इस वजह से उन्हें बच्चों की पसंद पर कोई एतराज नहीं था। लेकिन नूपुर के पापा को इस रिश्ते से थोड़ा सा इनकार था क्योंकि उनका मानना था कि दोनों ही अभी नासमझ हैं और इसलिए उन्होंने एक दूसरे के साथ रहने का फैसला जल्दबाजी में लिया है।
इसलिए उन्होंने नूपुर की मां से एक दिन कहा – सुनो रमा तुम नूपुर को समझाओ कि अंकित को लेकर वो इतनी सीरियस ना हो क्योंकि अभी ये दोनों ही छोटे हैं।
इस पर नूपुर की मां ने कहा- आप ये कैसी बातें कर रहे हैं? दोनों बच्चे इतने छोटे भी नहीं हैं कि अपना सही गलत ना समझ सकें। आप तो बस बेकार में ही परेशान हो रहे हैं। अंकित बहुत समझदार और सुलझा हुआ लड़का है और हमारी नूपुर भी हर अच्छी बुरी बात को समझती है।
इन सब बातों को सुनकर नूपुर के पापा चुप हो गए लेकिन उनके बिहेवियर से साफ लग रहा था कि वो इस रिश्ते से इतने ज्यादा खुश नहीं हैं।
यूं ही कुछ दिन गुजर गए और एक दिन ऐसा आया जब नूपुर के पापा का किसी और शहर में ट्रांसफर हो गया। लेकिन नूपुर अंकित को अपने पापा के ट्रांसफर के बारे में बता नहीं सकी, क्योंकि उसी दौरान अंकित के पापा का बहुत बुरी तरह से एक्सीडेंट हो गया था। उनके सिर में और हाथ पैरों में बहुत ज्यादा चोट लगी थी जिसकी वजह से घर के सभी लोग बहुत ज्यादा परेशान हो गए थे और आनन-फानन में हॉस्पिटल चले गए थे।
हॉस्पिटल में अपने पापा की ऐसी हालत देखकर अंकित को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने समझदारी से काम लेते हुए खुद पर काबू रखा और अपनी मां को भी समझाया – मम्मी आप बिल्कुल परेशान मत हो, पापा को कुछ नहीं होगा, वो बिल्कुल ठीक हो जाएंगे।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे