साया और मोहब्बत : एक अनसुलझी पहेली
रमेश, रागिनी और एक रहस्यमयी हवेली की कहानी, जहाँ मोहब्बत, साया और डर एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। पढ़िए एक अनसुलझी रहस्यमयी दास्तान।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
साया और मोहब्बत : वह भयानक रात!
सुबह 3 बजे का वक़्त था। तेज़ तूफानी बारिश हो रही थी। फिर भी रमेश एक शादी में ढोल बजाने अपने दोस्त बिरजू के साथ निकल पड़ता है। रमेश इतनी तेज बारिश में न चाहते हुए भी गरीबी के कारण काम पर निकल जाता है। गांव का रास्ता था, और तूफानी बारिश हो रही थी, इसलिए रमेश और बिरजू को कोई सवारी भी नहीं मिलती।
छाता लेकर कुछ दूर चलने के बाद वो दोनों थक कर एक पुरानी हवेली के पास बैठ जाते हैं और बारिश रुकने का इंतज़ार करते हैं। हवेली के गेट पर बैठे हुए अचानक से रमेश को हवेली के अंदर से लड़की की चीख सुनाई देती है। रमेश को लगता है कि जैसे हवेली के अंदर किसी के साथ कुछ गलत हो रहा है।
रमेश बिरजू से यह बात बताता है – “यार बिरजू क्या तुझे भी हवेली से किसी के चीखने की आवाज सुनाई दी”?
बिरजू कहता है – “नहीं, मुझे तो इस तरह की कोई भी आवाज़ सुनाई नहीं दी। लगता है रात में तेरी नींद पूरी नहीं हुई, इसलिए तुझे नींद में आवाजें सुनाई दे रही हैं”।
रमेश भी सोचता है कि शायद यह उसका वहम है। इतना सोचते ही बारिश रुक जाती है। लेकिन हवा की रफ़्तार अभी भी तेज़ी पकड़े हुए है। जैसे हवा में किसी के तड़पने की आवाज़ गूंज रही हो। इतने में रमेश बिरजू से कहता है – “बारिश तो रुक ही गई है चल बिरजू अब हम यहां से चलते हैं, मुझे यहां कुछ ठीक नहीं लग रहा है”।
इतना कहकर जैसे ही रमेश और बिरजू हवेली के गेट से आगे कदम बढ़ाते हैं। रमेश को फिर से किसी लड़की की चीखें सुनाई देती हैं और ऐसा लगता है कि वो रमेश से मदद मांग रही है। रमेश, रमेश….रमेश मुझे बचा लो।
फिर क्या था रमेश न आंव देखता है न तांव, वो हवेली की तरफ दौड़ता हुआ चला जाता है। लेकिन हवेली के अंदर जाते ही वहां सन्नाटा पसरा रहता है। अंदर उसे कोई भी दिखाई नहीं देता।
इतने में बिरजू भी उसके पीछे आ जाता है और रमेश से पूछता है – “क्या हुआ रमेश तुम अचानक से हड़बड़ाकर यहां पर क्यों आ गए”?
रमेश बिरजू से कहता है – “क्या तुमने वो आवाज़ नहीं सुनी जो मुझे सुनाई दी”?
बिरजू कहता है – “नहीं तो, मैंने तो ऐसी कोई भी आवाज़ नहीं सुनी और यहां पर कोई है भी तो नहीं”।
इतने में बिरजू रमेश से कहता है, “मुझे लगता है तेरी तबीयत ठीक नहीं है, साथ ही मौसम भी आज तूफानी है। इसलिए तुझे ऐसी आवाजें सुनाई दे रही हैं। चल अब हम दोनों चलते हैं। जिस गांव में हमें जाना है वो बहुत दूर है, अगर अभी से चलना शुरु नहीं किया तो हम वहां टाइम पर नहीं पहुंच पाएंगे, और सुबह बारात भी है। अगर हम वहां टाइम पर नहीं पहुंचे, तो लाला हमें काम करने के पैसे भी नहीं देगा”।
रमेश कहता है – “ठीक कह रहे हो तुम चलो चलते हैं”। इतना कहते हुए रमेश और बिरजू हवेली से बाहर निकलने वाले ही रहते हैं कि अचानक सफेद साड़ी में सिंदूर लगाए एक लड़की उनके सामने आ जाती है।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे