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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | वह पहला दिन और ज़िंदगी भर की दोस्ती की शरुवात! | क़िस्त 01 

अर्सलान और कशिश की पहली मुलाकात से शुरू होती एक कहानी, जहाँ घमंड, नफरत, दोस्ती और बदलते रिश्तों के बीच एक अनोखा सफर शुरू होता है।

कॉलेज में पहली बार आमने सामने अर्सलान और कशिश

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

वह पहला दिन और ज़िंदगी भर की दोस्ती की शरुवात!

“अपने आप को समझते क्या हो तुम. कितनी देर से हुमारे पीछे पीछे चले आ रहे हो. ज़यादा दिमाग़ खराब हो तो बताओ ? बुलाती हूँ अभी प्रिन्सिपल को.” बड़े ही गुस्से मैं बोली थी कशिश.

इतने मैं ज़ैन वहाँ आ पहुचा और बोला “क्या हुवा कशिश ? यह क्या तुम्हे परेशान कर रहा है. ” फिर वो अर्सलान की तरफ मुखातिब हुवा और काफ़ी ज़ोर से बोला, “क्यो बे किस लिए पीछा कर रहा था तू. कौन है. चल अपने रास्ते निकल.”

अर्सलान बोला “मैं अपने रास्ते ही जा रहा हूँ, यह मोहतार्मा भी उसी रास्ते जा रही हैं. यह मेरे आगे थी और मैं पीछे, इसका यह मतलब नही है की मैं इनका पीछा कर रहा हूँ. ”

इतना कह कर अर्सलान आगे निकल गया, और पीछे कशिश उसको घूर कर देखने लगी. फिर बोली “बड़ा बदतमीज़ शक़स है. पता नहीं कहाँ कहाँ से आ जाते है जाहिल लोग।” 

इस पर ज़ैन बोला “अरे तुम परेशान ना हो, इसकी अकड़ निकल देंगे जल्दी ही.” 

कशिश गुस्से से बोली “जल्दी नही आज ही निकालो इसकी अकड़. ताकि अगली बार हम से उँची आवाज़ मे ना बात करे.”

“आपका हुकुम सर – आँखों पर कशिश साहिबा, आज क्लास के बाद, इसको सीधा करता हूँ .” ज़ैन ने कहा. फिर वो भी अपने बाकी साथियों के साथ आगे बढ़ गए टेक्नालजी डिपार्टमेंट की तरफ.

कशिश यूनिवर्सिटी के सबसे बड़े ट्रस्टी और फिनांशल डोनर की बेटी थी. ज़रूरत से ज़्यादा घमंडी और बदतमीज़. एक लौटी औलाद होने की वजह से जयादा ही सिर चढ़ि भी थी. ज़ैन उसके फादर के पार्ट्नर का बेटा था, जो साथ ही पढ़ता था. वो एक बिगड़ा हुवा लड़का था.

क्लास मैं सब बैठे हुवे थे, जब प्रोफेसर शर्मा आए. वो अंदर आ कर सब से मुखातिब हो कर बोले. “आप सबको न्यू सेशन मैं देख कर खुशी होती है. अब जैसे की आप सब को पता है की हम सब का यह पहला दिन है तो आज मैं आपको कुछ ज़यादा परेशन नही करूँगा. बस जो कोर्स हमको कवर करना है उसका थोड़ा सा इंट्रो दूँगा और एक दो सवाल पूछूँगा.” 

फिर मिस्टर. शर्मा उनको कोर्स के कंटेंट्स की डीटेल देने लगे, फिर उन्होने एक सवाल पूछा “जैसा की आप लोगों को पता है की हम इंडस्ट्रियल डिज़ाइन्स पढ़ेंगे आने वाले दिनों मे , उनके 3डी  आंड 2डी  मॉडेल्स बनाएँगे. इस लिए मैं आप से कलर्स से रिलेटेड एक सवाल करता हूँ, आप मे से कौन सॅचुरेशन को डिफाइन कर सकता है?”

पूरे क्लास मैं कोई कुछ नही बोला. सब शांत थे एक दूसरे का चेहरा देख रहे थे. इधर कशिश मिस्टर शर्मा क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान नही दे रही थी, वो तो मज़े से अपने मोबाइल से खेल रही थी. तभी मिस्टर. शर्मा की नज़र उस पर पड़ी। वो बोले “कशिश तुम बताओ. ”

कशिश खड़ी हो गयी, पर उसको सवाल तो पता नही था. वो इधर उधर देखने लगी.

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे