जगजीत सिंह: जिसने ग़ज़ल को महफ़िलों की क़ैद से आज़ाद कर हर आम दिल तक पहुँचा दिया
बिना टिकट की ट्रेन, पिता की नाराज़गी, बेटे का ग़म और एक अधूरी महफ़िल। जगजीत सिंह की वह दास्तान पढ़िए, जिसने ग़ज़ल को हर दिल तक पहुँचाया।
बिना टिकट की ट्रेन, पिता की नाराज़गी, बेटे का ग़म और एक अधूरी महफ़िल। जगजीत सिंह की वह दास्तान पढ़िए, जिसने ग़ज़ल को हर दिल तक पहुँचाया।