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गलत और सही के पार.. रूमी का वो फलसफा जो 800 साल बाद भी ज़िंदा है

रूमी की वो नज़्म जो 800 साल बाद भी ज़िंदा है और फ़िल्म रॉकस्टार के मशहूर डायलॉग में ढली। जानिए ग़लत और सही के पार के मैदान का मतलब।

ग़लत और सही के पार - रूमी का फ़लसफ़ा

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

गलत और सही के पार.. यह नज़म कहती क्या है?

रूमी का कहना है कि दुनिया ने सही और गलत की जो दीवारें खड़ी की हैं, वो दीवारें असल नहीं हैं। असल वो जगह है जो उन दीवारों के पार है।

वो मैदान जहाँ कोई फैसला नहीं होता। कोई अदालत नहीं। बस लोग होते हैं, एक जैसे, हर रंग में रंगे हुए।

“जहां मैं हूँ, वहां से कुछ सफ़ेद या काला नहीं है। सब कुछ कई रंगों का है।”

नग़मा निगाररूमी (Rumi)
मौसिक़ारइम्तिआज़ अली
म्यूजिकए आर रेहमान

यह वो फलसफा है जो आज के इंसान को सबसे ज़्यादा चाहिए। एक ऐसी दुनिया में जहाँ हर चीज़ को सही या गलत के खाँचे में फिट करने की कोशिश होती है, रूमी कहते हैं, रुको। ज़रा उस मैदान की तरफ देखो।

मोहब्बत हो, दोस्ती हो, कोई ऐसा रिश्ता जिसे दुनिया की नज़र में नाम देना मुश्किल हो, रूमी कहते हैं इन सबका जवाब वहाँ है। उस मैदान में। जहाँ हर इंसान अपने-अपने रंग में आता है और कोई उसे जज नहीं करता।

क्यों यह नज़म आज भी ज़िंदा है

800 साल पहले लिखा गया कलाम आज भी इतना ताज़ा क्यों लगता है? क्योंकि रूमी ने इंसान की बात की थी। इंसानी दिल की बात। और इंसानी दिल हर ज़माने में एक जैसा रहता है। मोहब्बत में पड़ा हुआ इंसान आज भी वही सोचता है जो उस वक्त सोचता था। “सब कुछ गलत है, लेकिन गलत लग क्यों नहीं रहा?” यही सवाल है। यही रूमी का मैदान है।

यह नज़म सिर्फ प्रेम की नहीं है। यह इंसान के उस बुनियादी दर्द की बात करती है जो उसे हमेशा सताता है। अच्छा क्या है, बुरा क्या है, सही क्या है, गलत क्या है! यह सवाल इंसान को हर रोज़ घेरते हैं। रूमी ने उस पूरी उलझन को एक मैदान का नाम दे दिया।

इंटरनेट पर इस नज़म को बार-बार शेयर किया जाना कोई इत्तफाक नहीं है। लोग इसे इसलिए शेयर करते हैं क्योंकि यह उनकी अपनी कहानी लगती है। अपने जज़्बात की आवाज़ लगती है। और यही किसी भी कलाम की सबसे बड़ी कामयाबी होती है। जब पढ़ने वाला यह महसूस करे कि यह मेरे बारे में लिखा गया है। तो क्या राय है आपकी इस फलसफे के लिए क्या रूमी की यह नज़्म Galat Aur Sahi Ke Paar आपके दिल मे कुछ अहसास कराती है।


अगर इसी तरह की उर्दू और हिंदी शायरी की तलाश है जो दिल को छू जाए, तो शायरी और नज़्म सेक्शन में और भी बहुत कुछ है।