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एक किस्त, एक दास्तान

रकीबनामा: दो दुश्मनों की दास्तान

एक तूफ़ानी रात में दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी बर्फ़ में फंस जाते हैं, और सामने आता है तीन साल पुराना एक ऐसा सच जिसने दोनों की ज़िंदगी बदल दी।

अलीज़ा और दानिश बर्फ़ीले तूफ़ान में पीठ से पीठ सटाए खड़े, तूफ़ान में दो अजनबी कहानी

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

“पहाड़ ख़ामोश रहते हैं, मगर झूठ कभी छुपाते नहीं।” यह बात हर पुराने ट्रेकर की ज़ुबान पर होती है, और बरसों तक अलीज़ा ने इसे अपनी सबसे बड़ी सच्चाई मानकर जी भी लिया था। मगर एक बर्फ़ीली रात ने उसे सिखाया कि पहाड़ों की यही ख़ामोशी आखिरकार उसे वो सच भी सुना देगी जो तीन साल से दबा हुआ था।

हवा इतनी तेज़ थी कि उसकी सीटी सुनकर लगता था कोई पहाड़ ख़ुद चीख़ रहा हो। बर्फ़ इतनी घनी गिर रही थी कि टॉर्च की रौशनी दो क़दम आगे जाकर ख़त्म हो जाती थी। और कहीं पीछे, अंधेरे में, एक चीख़ गूँज रही थी।

यह किसी फ़िल्म का क्लाइमैक्स नहीं था। यह कसोल की वादियों में एक आम ट्रेकिंग सीज़न की वो शाम थी, जो अगले कुछ घंटों में दो ज़िंदगियों का सबसे ख़तरनाक और सबसे ज़रूरी सफ़र बनने वाली थी।

दो एजेंसियाँ, एक दुश्मनी

कसोल के बाज़ार में हर कोई जानता था, अलीज़ा की “पहाड़ी सफ़र” और दानिश की “रकीब ट्रेल्स” एक दूसरे का साया तक बर्दाश्त नहीं करतीं। सिर्फ़ एक हफ़्ते पहले, दोनों की तीखी नोकझोंक बाज़ार के बीचोंबीच हो चुकी थी, जब एक विदेशी ग्रुप ने आख़िरी वक्त पर अपनी बुकिंग “पहाड़ी सफ़र” से “रकीब ट्रेल्स” में बदल ली थी। “हमरे ग्राहक चुराना बंद करो दानिश,” अलीज़ा ने सरेआम कहा था। “मैं किसी को मजबूर नहीं करता आने के लिए,” दानिश ने उतनी ही सख़्ती से जवाब दिया था, “शायद तुम्हारे रवैये से थक गए होंगे।” पूरा बाज़ार तमाशा देखता रह गया था।

अलीज़ा ने अपने मरहूम अब्बू की एजेंसी अकेले संभाली थी। हर पगडंडी, हर चट्टान, हर मौसम का मिज़ाज उसे ज़ुबानी याद था, अब्बू ने ख़ुद सिखाया था। दानिश कभी उसके अब्बू का शागिर्द हुआ करता था, उन्हीं का हाथ पकड़कर पहाड़ चढ़ना सीखा था, तीन साल पहले तक। फिर एक रात आई, जिसने सब कुछ बदल दिया।

कुछ नफ़रतें मोहब्बत से ज़्यादा गहरी लगती हैं, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनके पीछे की सच्चाई कभी कही नहीं जाती।

उस रात, एक ट्रेक पर अलीज़ा के अब्बू की तबीयत अचानक ख़राब हो गई थी। तेज़ बर्फ़बारी, कोई नेटवर्क नहीं, और साथ था सिर्फ़ दानिश। दुनिया को यही पता चला कि दानिश “ग़लत रास्ते” से नीचे उतरा, जिस वजह से मदद पहुँचने में देर हो गई। अलीज़ा ने उसे उसी हफ़्ते एजेंसी से निकाल दिया, और तब से आज तक उसकी शक्ल देखना गवारा नहीं किया।

दानिश ने कभी सफ़ाई नहीं दी। न उस रात, न बाद में। कुछ लोग कहते हैं वो शर्मिंदा था, कुछ कहते हैं वो बेशर्म था। असली वजह सिर्फ़ दानिश जानता था, और वो वजह उसने आज तक किसी को नहीं बताई थी।

जब पहाड़ ने ग़ुस्सा दिखाया

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे