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मोहम्मद शमी! रफ़्तार के जादूगर का दिल को छू लेने वाला सफर!

चोट, इल्ज़ाम और नफ़रत, हर तूफ़ान के बावजूद मोहम्मद शमी मैदान पर लौटे और इतिहास रचा। जानिए उनकी पूरी दास्तान, हैट्रिक से लेकर 7/57 तक।

मोहम्मद शमी गेंद से स्टंप उखाड़ते हुए, तेज़ गेंदबाज़ की दास्तान

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

जब स्कोरबोर्ड पर आख़िरी आँकड़े दिखे, सबकी साँसें थम गईं, सात विकेट, सिर्फ़ सत्तावन रन। न्यूज़ीलैंड की पूरी पारी में गिरे दस विकेटों में से सात अकेले शमी के नाम थे। ये आज तक किसी भी भारतीय गेंदबाज़ का वनडे में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है, और शमी सिर्फ़ सत्रह मैचों में वर्ल्ड कप के पचास विकेट पूरे करने वाले सबसे तेज़ गेंदबाज़ बन गए। भारत सत्तर रन से जीता और फ़ाइनल में पहुँच गया।

“जिस गेंदबाज़ को टीम में जगह मिलने का यक़ीन तक नहीं था, उसी ने पूरे टूर्नामेंट को अपने नाम कर लिया। यही खेल का सबसे बड़ा इंसाफ़ होता है।”

मगर इस शानदार प्रदर्शन के फ़ौरन बाद, शमी की एड़ी में गंभीर चोट लगी। एक साल से भी ज़्यादा वक़्त तक वो हर फ़ॉर्मेट से दूर रहे। उम्र पैंतीस के क़रीब पहुँच रही थी, टेस्ट क्रिकेट से तो अठारह महीने से ज़्यादा दूरी हो चुकी थी, और बहुतों को लगने लगा था कि शायद शमी का वक़्त ख़त्म हो चुका है।

मगर शमी ने फिर वही किया, जो वो हमेशा से करते आए थे, ख़ामोशी से मेहनत, और मैदान पर जवाब। 2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी में वापसी की, पाँच मैचों में नौ विकेट लिए, और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। इसी दौर में शमी संयुक्त रूप से दो सौ वनडे विकेट तक सबसे तेज़ पहुँचने वाले गेंदबाज़ों में शुमार हुए।

घर की दुनिया: जब मैदान के बाहर भी लड़नी पड़ी लड़ाई

जून 2014 में मोहम्मद शमी का निकाह हसीन जहाँ से हुआ, जो एक मॉडल थीं। दोनों की एक बेटी भी है। कुछ बरस तक ज़िंदगी सामान्य ढंग से चली, शमी अपने करियर में आगे बढ़ते रहे, और अपनी बेटी के साथ जो भी वक़्त मिल पाता, उसे पूरी शिद्दत से जीते रहे।

शमी की ज़िंदगी सिर्फ़ मैदान की कामयाबियों तक महदूद नहीं रही। 2015 वर्ल्ड कप के दौरान उनका फ़ोन एक कथित सट्टेबाज़ से जुड़े होने की ख़बरें आईं, जिसके बाद BCCI ने पूरी जाँच की और उन्हें हर इल्ज़ाम से बरी कर दिया।

2018 में शमी की निजी ज़िंदगी को लेकर एक और मुश्किल दौर आया, जब उनकी पत्नी हसीन जहाँ ने उन पर घरेलू हिंसा और बेवफ़ाई के गंभीर इल्ज़ाम लगाए। मामला अदालत तक पहुँचा, और यह एक ऐसा दौर था जो शमी के लिए निजी तौर पर बेहद तकलीफ़देह रहा। हम इस मामले की गहराई में नहीं जाते, क्योंकि ये एक निजी और संवेदनशील मसला है, मगर इतना ज़रूर कहेंगे कि इस उथल-पुथल के बावजूद शमी ने अपने खेल पर से ध्यान नहीं हटाया, और मैदान पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते रहे।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे