मोहम्मद शमी! रफ़्तार के जादूगर का दिल को छू लेने वाला सफर!
चोट, इल्ज़ाम और नफ़रत, हर तूफ़ान के बावजूद मोहम्मद शमी मैदान पर लौटे और इतिहास रचा। जानिए उनकी पूरी दास्तान, हैट्रिक से लेकर 7/57 तक।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
2021 टी20 वर्ल्ड कप में जब भारत पाकिस्तान से हार गया, तो शमी को सोशल मीडिया पर बेहद शर्मनाक ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कई फ़ैंस और पर्यवेक्षकों को साफ़ तौर पर लगा कि उन्हें निशाना सिर्फ़ इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि वो मुस्लिम हैं, और यही सोचकर एक बड़े तबक़े ने खुलकर इस पक्षपात और नफ़रत भरी ट्रोलिंग की कड़ी निंदा की। टीम इंडिया और उनके साथी खिलाड़ियों ने भी खुलकर शमी का साथ दिया। कप्तान विराट कोहली ने सार्वजनिक तौर पर इस नफ़रत की कड़ी निंदा की, और कहा कि शमी उनके भाई की तरह हैं। शमी ख़ुद इस दौर में भी चुप और मज़बूत बने रहे, अपनी गेंदबाज़ी से ही जवाब देना उन्हें बेहतर लगा।
फ़ॉर्म अच्छा, मगर टीम में जगह का इंतज़ार
2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी के बाद से शमी को भारतीय टीम में दोबारा मौक़ा नहीं मिला। मगर इस दौरान वो घरेलू क्रिकेट से कभी दूर नहीं हुए, लगातार बंगाल के लिए खेलते रहे, और सितंबर में ईस्ट ज़ोन को तेरह साल बाद दलीप ट्रॉफ़ी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनका फ़ॉर्म, उनकी फ़िटनेस, कुछ भी सवालों के घेरे में नहीं था, फिर भी राष्ट्रीय टीम के दरवाज़े बंद ही रहे।
इसी बात को लेकर क्रिकेट जगत में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। सौरव गांगुली ने खुलकर कहा है कि शमी को टीम में वापस बुलाया जाना चाहिए, “उन्हें बुमराह के दूसरे छोर से गेंदबाज़ी करनी चाहिए, कहीं और नहीं।” रवि शास्त्री ने भी अपने काल्पनिक 2027 वर्ल्ड कप स्क्वाड में शमी को जगह दी है। वहीं सुनील गावस्कर जैसे कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हर्षित राणा जैसे युवा गेंदबाज़ों पहले शमी पे भरोसा करना चाहिए । शमी के चाहने वालों का कहना है कि जब जुलाई 2026 में लॉर्ड्स के मैदान पर युवा गेंदबाज़ गुरनूर बरार बिना विकेट लिए दस ओवर में सत्तानवे रन लुटा बैठे, किसी भारतीय गेंदबाज़ का लॉर्ड्स पर अब तक का सबसे महँगा प्रदर्शन, तब भी टीम मैनेजमेंट ने शमी की तरफ़ रुख़ नहीं किया, जबकि शमी का अनुभव और फ़ॉर्म दोनों उनके पक्ष में खड़े थे।
शमी ख़ुद इस बहस से दूर रहते हैं। उनका जवाब वही पुराना है, जो उन्होंने हमेशा दिया है, गेंद हाथ में लेकर, मैदान पर।
विरासत: वो गेंदबाज़ जो हर तूफ़ान से मज़बूत होकर निकला
आज मोहम्मद शमी भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज़ों में गिने जाते हैं। चाहे टेस्ट हो, वनडे हो या टी20, उनकी रिवर्स स्विंग हर फ़ॉर्मेट में बल्लेबाज़ों के लिए एक पहेली बनी रहती है। मगर शायद उनकी असली पहचान सिर्फ़ उनकी गेंदबाज़ी नहीं, बल्कि वो जज़्बा है, जिसने उन्हें हर चोट, हर इल्ज़ाम, और हर नफ़रत के बावजूद मैदान पर वापस ला खड़ा किया।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे