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एक सुरमई शाम का सफ़र

अशआर का सफर
Ek Surmai Shaam
Ek Surmai Shaam "एक सुरमई शाम की दास्तान जो मोहब्बत और सुकून से भरपूर है। इस नज़म में झील के किनारे दो अजनबी मिलते हैं और उनकी मुलाक़ातें शायरी और...
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Ek Surmai Shaam

Ek Surmai Shaam “एक सुरमई शाम की दास्तान जो मोहब्बत और सुकून से भरपूर है। इस नज़म में झील के किनारे दो अजनबी मिलते हैं और उनकी मुलाक़ातें शायरी और एहसास के खूबसूरत लफ़्ज़ों में ढल जाती हैं। पढ़ें और महसूस करें मोहब्बत की मीठी मिठास।” "हवा से खेलते ये तेरे केसु,झील के पानी में ... Read more


“एक सुरमई शाम की दास्तान जो मोहब्बत और सुकून से भरपूर है। इस नज़म में झील के किनारे दो अजनबी मिलते हैं और उनकी मुलाक़ातें शायरी और एहसास के खूबसूरत लफ़्ज़ों में ढल जाती हैं। पढ़ें और महसूस करें मोहब्बत की मीठी मिठास।”

"हवा से खेलते ये तेरे केसु,
झील के पानी में जैसे चाँद का अक्स।
तुझे देखा तो ये दिल कह उठा,
शायद आज की शाम है तुझसे महकती हुवी।"
"शामें कहानियाँ सुनाती हैं,
हर लम्हा दिल के करीब लाती हैं।
तेरी बातें हैं जैसे बहारों का मिज़ाज,
हर जुमला ख़ुशबू में डूबा हुआ।"

Ek Surmai Shaam: A Romantic Nazam

एक सुरमई शाम का सफ़र !वह एक खूबसूरत शाम!

सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था, और आसमान सुनहरी से सुरमई हो रहा था। हल्की ठंडी हवा के साथ पेड़ों की पत्तियाँ एक संगीत-सा गा रही थीं। झील के किनारे बने छोटे से लकड़ी के पुल पर वो अकेला खड़ा था। आँखें दूर-दूर तक फैले पानी पर टिकाए, वो जैसे ख़ुद से बातें कर रहा था।

उसकी आदत थी कि जब भी दिल भारी होता, वो यहाँ चला आता। यह झील उसकी तन्हाई की साथी थी। आज भी वो यहाँ उसी सुकून की तलाश में आया था। लेकिन उसे पता नहीं था कि ये शाम उसकी ज़िंदगी का एक नया सफ़ा लिखने वाली थी।

झील के दूसरी तरफ़ उसकी नज़र गई। एक लड़की, हल्के नीले रंग का सूट पहने, दुपट्टे से खेलते हुए, पानी के किनारे खड़ी थी। उसका चेहरा हल्की रोशनी में चमक रहा था, और बाल खुले हुए हवा के साथ झूल रहे थे।

"सूरज की आख़री किरणों से,
तेरे चेहरे का नूर रोशन हुआ।
झील की इस ख़ामोशी में,
मेरा दिल तेरा दीवाना हुआ।"

उसने नज़रों को झुका लिया, जैसे उसने चोरी करते हुए पकड़ा हो। लेकिन उस लड़की के मुस्कुराने की हल्की झलक ने उसके दिल की धड़कनों को तेज़ कर दिया।

वो अपने आप को रोक नहीं पाया। धीरे-धीरे झील के किनारे चलते हुए उसकी तरफ़ बढ़ने लगा। जैसे-जैसे वो करीब आता गया, उसे लगा कि उस लड़की का वजूद इस शाम में और भी रंग भर रहा है।

“क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ?” उसने झिझकते हुए पूछा।
लड़की ने पलट कर देखा, उसकी आँखों में एक अजीब-सा सुकून था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, क्यों नहीं। यह जगह सबकी है।”

दोनों के बीच थोड़ी देर तक ख़ामोशी छाई रही। लेकिन ये ख़ामोशी बोझिल नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे दोनों उस ख़ामोशी में एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे हों।

"कुछ बात है तेरी इस ख़ामोशी में,
जो दिल के करीब लाती है।
तू कुछ कहे न कहे,
तेरी हर अदायें मोहब्बत का पैग़ाम सुनाती हैं।"

झील किनारे की मुलाक़ात उस सुरमई शाम

लड़के ने बातचीत शुरू की, “तुम यहाँ अक्सर आती हो?”
लड़की ने झील के पानी को देखते हुए जवाब दिया, “हाँ, यह जगह मुझे मेरे ख़ुद के सबसे करीब ले आती है।”
उसके शब्द जैसे उसकी रूह में उतर गए। वो जानता था कि इस मुलाक़ात का हर पल ख़ास था।

धीरे-धीरे दोनों की बातें बढ़ने लगीं। वो अपने सपनों, अपने ग़म, और ज़िंदगी की उलझनों के बारे में बात करने लगे। लड़के ने महसूस किया कि उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी मिठास थी, जो दिल को सुकून देती थी।

"तेरी हर बात में एक नज़ाकत है,
जैसे बहारों का एक पैग़ाम।
तेरे लफ़्ज़ों में बसी है वो ख़ुशबू,
जो दिल को कर दे बेक़रार।"

शाम धीरे-धीरे रात में बदलने लगी। झील के किनारे लगी लाइटें झिलमिला उठीं। उनके आस-पास एक जादुई सन्नाटा छा गया था। दोनों ने महसूस किया कि वक़्त थम-सा गया है।

लड़की ने कहा, “मुझे अब चलना चाहिए। रात हो रही है।”
लड़के का दिल उसे रोकना चाहता था, लेकिन वो जानता था कि हर मुलाक़ात का एक वक़्त होता है। उसने कहा, “फिर मिलेंगे?”
लड़की मुस्कुराई और बोली, “शायद। यह झील हमेशा गवाह बनेगी।”

वो लड़की चली गई, लेकिन उस शाम ने लड़के के दिल में एक ऐसी छाप छोड़ी, जो शायद कभी नहीं मिट सकती।

"रात की चादर तले,
तेरी यादों का साया है।
तू दूर होकर भी,
दिल के करीब आया है।"

इस मुलाक़ात ने लड़के को एक नई सोच और उम्मीद दी। उसने पहली बार महसूस किया कि सच्चा सुकून किसी और के साथ जुड़ने में भी हो सकता है।

अगली शाम वह फिर उसी झील के किनारे आया, लेकिन वो लड़की नहीं दिखी। हर दिन उसने उसका इंतजार किया, पर वो नहीं लौटी। झील के किनारे पर उस लड़की के साथ बिताए लम्हों ने उसकी तन्हाई को एक नया नाम दिया: एक सुरमई शाम का सफ़र

"हर शाम तेरा इंतज़ार करती है,
झील की लहरें तुझसे प्यार करती हैं।
तू लौट आए किसी रोज़,
दिल ये दुआ हर बार करता है।"

सुरमई शाम और झील का किनारा

झील का किनारा,
सुरमई शाम का सहारा।
दूर कहीं सूरज का ढलना,
जैसे किसी दिल का ग़म संभालना।

हवा की सरसराहट में,
तेरे क़दमों की आहट।
पानी पर चाँद का अक्स,
तेरे चेहरे की मासूमियत का जादू।

तेरी मुस्कान,
जैसे किसी थकी हुई रूह का आराम।
तेरी बातें,
जैसे ख़ामोशी की ज़ुबान।

इस झील ने गवाह बनकर,
हमारे लम्हों को समेट लिया।
तेरी ख़ुशबू, तेरी सदा,
हर चीज़ ने मुझे मोहब्बत सिखा दिया।

अब हर शाम तेरा इंतज़ार करती है,
हर लहर तुझसे प्यार करती है।
यह झील, यह हवा,
तेरी यादों का पैग़ाम देती है।

शायद वो पल मुकम्मल न हुआ,
पर मोहब्बत कभी अधूरी नहीं होती।
तेरी तस्वीर मेरी रूह में बसी है,
और मेरी हर शाम तेरे नाम होती है।
एक सुरमई शाम का सफ़र

पता है , यहाँ से बहुत दूर, गलत और सही के पार!

इस खूबसूरत नज़म के बारे में और जाने

“एक झील के किनारे की दिलचस्प दास्तान, जहाँ दो अजनबियों की मुलाक़ात मोहब्बत का रंग ले लेती है। इस नज़म के हर मोड़ पर आपको शायरी और एहसास की मिठास मिलेगी।” यह नज़मऔर शायरी इसे और भी प्रभावशाली बनाती है। इसे सोशल मीडिया पर भी साझा करें और पढ़ने वालों के दिलों तक इसे पहुँचाएँ।


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