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तेरी उल्फत में | मोहब्बत, गलतफहमियां, और रिश्तों की उलझनें | क़िस्त 09

मोहब्बत और गलतफहमियों की दस्तक अरसलान अपनी सीट पे बैठा था। तभी राज और न्यूटन उसके पास आके बैठ गए। “यार न्यूटन, तुमको पता है कि आज कोई शमशेर सर के यहां डिनर पे इनवाइटेड है।” राज ने अरसलान को सुनाते हुए न्यूटन को कहा। “अच्छा भाई, अब तो लगता है कि शमशेर सर के […]

अरसलान और कशिश पुलिस स्टेशन की घटना के बाद | तेरी उल्फत में क़िस्त 09

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

मोहब्बत और गलतफहमियों की दस्तक

अरसलान अपनी सीट पे बैठा था। तभी राज और न्यूटन उसके पास आके बैठ गए। “यार न्यूटन, तुमको पता है कि आज कोई शमशेर सर के यहां डिनर पे इनवाइटेड है।” राज ने अरसलान को सुनाते हुए न्यूटन को कहा।

“अच्छा भाई, अब तो लगता है कि शमशेर सर के वहां रेगुलर आना जाना होगा, जनाब का।” न्यूटन ने भी सुनाते हुए कहा।

“तुम सब लोगों का दिमाग खराब हो गया है क्या। यार एक डिनर ही तो है।” अरसलान ने कहा।

“मेरे बच्चे यहीं से शुरुआत होती है। तुम समझ नहीं रहे।” न्यूटन ने बड़े ही सीरियस अंदाज में कहा।

“क्या नहीं समझ रहा मैं?” अरसलान ने पूछा।

“मेरे भाई, शमशेर सर शुरू से ही तुमको मानते हैं। मुझे लग रहा है कि तुममें उनको अपना होने वाला दामाद दिख गया है।” राज ने कहा तो अरसलान बोला “दिमाग फिर गया है तुम सबका।”

राज और न्यूटन हंसते हुए वहां से चले गए।

कुछ देर बाद कशिश अरसलान के पास आई और बोली, “मुझे किसी काम से कॉलेज तक जाना है। वहां एक घंटा लग सकता है। तुम खुद घर आ जाओ।”

“कोई नहीं, कशिश अच्छा ही हुआ, इसी बहाने मुझे फ्रेश होने का टाइम मिल जाएगा। अभी 6 बजा है। आप कॉलेज जा ही रही हो तो, मुझे हॉस्टल छोड़ देना और एक घंटे बाद मुझे पिक कर लेना। तब तक मैं तैयार हो जाउंगा।” अरसलान ने बड़ी ही मासूमियत से कहा।

कशिश का मूड अब और खराब हो गया, कहां वह अरसलान से पीछा छुड़ाने की सोच रही थी, अब उसे लेकर हॉस्टल, फिर घर जाना पड़ेगा।

“कशिश चलिए, आपको कॉलेज में काम भी है, बेकार देर हो जाएगी” अरसलान ने कशिश के ख्यालों को तोड़ा। अब उसे न चाहते हुए भी अरसलान के साथ कॉलेज जाना पड़ रहा था।

कशिश की कार के पास पहुंच कर अरसलान ने कहा “कहां बैठूं?”

कशिश ने झल्ला के कहा “मेरे सर पर बैठो।”

“रियली! पर मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं? “अरसलान ने मासूमियत से कहा तो कशिश ने कहा” “आगे बैठो, पीछे बैठो, जहां दिल करे तुम्हारा। बस मेरा खून ना जलाओ।” अरसलान आगे बैठ गया। तो कशिश ने कार स्टार्ट करी।

“सीट बेल्ट तो लगा लीजिए कशिश। सेफ्टी के लिए।” अरसलान ने कशिश को टोका।

“नहीं लगाती, क्या कर लोगे।” कशिश ने फिर झल्ला के कहा।

अरसलान बोला “मुझे क्या करना, मैं तो आपकी सेफ्टी के लिए कह रहा था। जानती हैं आप, कि रोड पे होने वाले एक्सीडेंट में जो डेथ्स होती हैं, उसमें ज्यादातर डेथ्स का रीज़न सीट बेल्ट ना लगाने से होती है।”

कशिश ने गुस्से से अरसलान को घूरा। फिर उसने ना चाहते हुए सीट बेल्ट लगा ली। फिर बोली “अब खुश हो या कुछ और इश्यू है।”

“आपका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने मेरी बात मानी। बड़ी मेहरबानी होगी कि आप मुझ पे गुस्सा न करके ड्राइविंग पे ध्यान दें।” अरसलान ने जवाब दिया।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे