तेरी उल्फत में | कशिश और अरसलान के टकराव की पहली झलक | क़िस्त 07
कशिश की एंट्री का असर आज ऑफिस का महौल कुछ अलग था, कशिश जो ऑफिस आने वाली थी। सारे स्टाफ में उसी को ले के बातें हो रही थी। सभी यह सोच रहे थे कि उसके आने से कैसे बदलाव आते हैं। सभी को उसके घमंद और एटीट्यूड का पता था। कशिश कोई दोपहर तीन […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
कशिश की एंट्री का असर
आज ऑफिस का महौल कुछ अलग था, कशिश जो ऑफिस आने वाली थी। सारे स्टाफ में उसी को ले के बातें हो रही थी। सभी यह सोच रहे थे कि उसके आने से कैसे बदलाव आते हैं। सभी को उसके घमंद और एटीट्यूड का पता था। कशिश कोई दोपहर तीन बजे ऑफिस में दाखिल हुई। दाखिल होते ही उसका सामना अरसलान से हुआ। वह और मोहित किसी नये प्रोजेक्ट पर डिस्कशन कर रहे थे।
“वेलकम कशिश, सर ने बताया था कि आप आज आने वाली हैं।” मोहित ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा।
कशिश ने अरसलान को देखते हुए कहा “कशिश नहीं कशिश मैम बोलिए तो बेहतर होगा, मिस्टर मोहित। क्या आपको मालिक और नौकर का फर्क नहीं पता?”
फिर वह अरसलान से मुखातिब होते हुए बोली “तुमको सैलरी यहां काम करने के लिए मिलती है ना कि टहेलने की। और जब मालिक को देखो तो ज़रा रिस्पेक्ट देना सीखो! अब जाओ अपनी जगह और काम करो।”
यह कहकर कशिश एक केबिन में चली गई। सब उसकी हरकत को हैरानी से देखते रह गए। सब यही सोच रहे थे कि शमशेर खान ने तो कभी किसी से ऐसे बात नहीं की। कुछ देर बाद ऑफिस बॉय कशिश के लिए कॉफी ले के गया।
“यह क्या ले के आए हो तुम, इसको कॉफी कहते हैं? इसे जानवर भी नहीं पिएंगे जाहिल इंसान। तुम इसी वक्त यहां से निकलो। तुम्हारी नौकरी खत्म।” अंदर से कशिश की गुस्से से भारी आवाज आई। फिर केबिन से मायूस सा ऑफिस बॉय निकला। मिस्टर मोहित के पास आ के वह उनको देखने लगा। वह परेशान था।
मोहित ने तसल्ली देते हुए कहा “तुम अभी जाओ शंकर, और परेशान ना हो। मैं सर से बात करूंगा। तुम्हारी नौकरी बहाल हो जाएगी।”
शंकर उम्मीद लिए बाहर चला गया। शंकर एक अच्छा मुलाजिम था। शमशेर खान के साथ कई सालों से काम कर रहा था। पूरे ऑफिस में सन्नाटा छाया था, कि कशिश ने इंटरकॉम पे अरसलान को बुलाया।
अरसलान “जी मैम।”कशिश “हम्म, तुम कुछ काम वाम करते हो या सिर्फ यहां मुफ्त में सैलरी उठाते हो।”
अरसलान ज़ब्त के साथ जवाब देता है “मैम आप रिकॉर्ड्स देख लीजिए, आप मोहित सर से भी दरयाफ्त कर लीजिए, अगर आपको लगे कि मैं ठीक काम नहीं कर रहा।
कशिश बोली “ओह … उन सबको तुम बेवकूफ बना सकते हो मुझे नहीं, अरसलान खान। तुम में पता नहीं पापा को क्या दिखता है कि वह तुम्हें सर पे चढ़ाए हुए हैं। मेरा बस चले तो तुमको एक मिनट ना रहने दूं।” अरसलान को गुस्सा तो बहुत आया पर वह चुप रहा।
कशिश फिर बोली “एक काम करो, जा के ऊपर कैफेटेरिया से मेरे लिए एक हार्ड कॉफी ले के आओ। यहां आकर मेरा सर दर्द करने लगा है।”
"रिश्ते हैं दिलों के, नफरत से नहीं चलते,
झुकी नज़रें भी इज़्ज़त की दास्तां कहती हैं।"
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे