होम / एक किस्त, एक दास्तान / डेविल… एक छुपा राज़!
एक किस्त, एक दास्तान

डेविल… एक छुपा राज़!

जुर्म की दुनिया के बेताज बादशाह डेविल का असली चेहरा क्या है? आलिम, दानिया और सीक्रेट पुलिस ऑफिसर रयान की रहस्यमयी और रोमांचक कहानी पढ़िए।

आलिम शाह की रहस्यमयी पहचान और डेविल का छुपा राज़

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

वो लड़की जो कि अपनी आखें बंद करके चीख रही थी। अचानक कुछ ना होने पर उसने अपनी आखें खोली और देखने लगी कि वो लड़का ज़मीन पर पड़ा दर्द में कराह रहा है। आलिम उस डरी सहमी लड़की को देख ही रहा था कि तभी अचानक से वो तीनो लड़के आलिम की तरफ आए, जिनमें से एक के हाथ में पिस्तौल थी। लड़के ने मौका पाते ही आलिम की पुष्त पर गोली चलानी ही चाही थी कि वो लड़की चिलाई, बचिए वो मार देगा आपको……वो लड़की चीख ही रही थी, लेकिन आलिम के सुकून में कोई कमी नहीं थी। वो वैसे ही खड़ा हुआ था।

जो लड़का बंदूक लेके आलिम के पास आ रहा था उसे आलिम ने एक झटके से घूम कर गले से दबोचा। उसकी मज़बूत गिरफ्त में आने से उस लड़के के हाथ से पिस्तौल गिर गई। आलिम ने उन लड़कों को एक एक करके सबक सिखाया…. और अब वो चारो लड़के ज़मीन पर पड़े हुए थे। ऐसे ही आलिम को जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह नहीं कहा जाता था। उसके लिए इन चार लड़कों को सबक सिखाना कोई बड़ी बात नहीं थी। उसने बहुत से कत्ल किए थे और वो भी बड़ी ही बेरहमी से।

अब आलिम अपने हाथ झाड़ते हुए उस लड़की की तरफ आया, जो खौफ से कांप रही थी। इस ठंड के मौसम में रात के एक बजे लड़की के जिस्म पर कोई मुनासिब कपड़े नहीं थे। उसके सिर से खून निकल रहा था और आँखें भी सूजी हुई थीं। लड़की की ये हालत देखकर आलिम ने उसका नीचे गिरा हुआ दुपट्टा उठाया और उसे दिया।

लड़की ने फौरन अच्छी तरह खुद को कवर कर लिया। कौन हो तुम और इस वक़्त यहां क्या कर रही हो और ये लोग कौन थे? “आलिम ने लड़की से पूछा”। मेरा नाम दानिया है, मैं बनारस में रहती हूं, मेरे पापा एक गवर्मेंट कॉलेज में टीचर हैं।

आलिम ने कहा – तुम बनारस की हो तो यहां भोपाल में क्या कर रही हो? दानिया ने रोते हुए कहा – मैं यहां अपनी सहेली के यहां उसकी शादी में आयी थी, और उसी के फ्लैट में रुकी थी। उसकी शादी की तैयारियों में उसकी मदद करवा रही थी। तभी मैं मेरी सहेली की बहनों के साथ मार्केट कुछ सामान लेने गई थी। मार्केट में बहुत ज़्यादा भीड़ होने की वजह से मैं और मेरी सहेली की बहनें अलग अलग हो गईं और फिर मुझे उन लोगो को ढूंढते ढूंढते रात हो गई, लेकिन वो लोग नहीं मिली। और फिर मैं रास्ता भटक गई।

मैं अपनी सहेली का घर ढूंडने के लिए जा ही रही थी कि रास्ते में ये लड़के मुझे परेशान करने लगे। मैं बहुत मुश्किल से वहां से अपनी जान बचा कर यहां आई। लेकिन ये लोग यहां भी मेरे पीछे आ गए।

तो तुम उनको फोन भी तो कर सकती थी – आलिम ने कहा। हां, लेकिन मेरा बैग जिसमें मेरा फोन, आईडी कार्ड और पैसे थे, वो सना दीदी के पास रह गया था – दानिया दबी आवाज़ से बोली।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे