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क़ाज़ी तौक़ीर: बीस बरस की ख़ामोशी के बाद फिर गूँजा श्रीनगर के उस रॉकस्टार का नाम

Fame Gurukul के विजेता क़ाज़ी तौक़ीर बीस बरस बाद Bigg Boss 20 में कैसे बने रॉकस्टार? श्रीनगर से घर-घर तक की पूरी दास्तान पढ़िए।

फ़ेम गुरुकुल के विजेता की वापसी की पूरी दास्तान

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

बचपन के दोस्त और पड़ोसी शेख़ अनीस को वो दिन याद हैं जब तौक़ीर गली क्रिकेट में सचिन की तरह बल्ला घुमाया करता था, और टैगोर हॉल व यूथ हॉस्टल की महफ़िलों में मुन्नी बेगम की ग़ज़ल गुनगुनाता था। दोस्त जब फ़रमाइश करते तो वह ऋतिक रोशन के डांस स्टेप भी हू-ब-हू उतार देता। 2005 में रफ़ी के प्रोग्राम “साज़-ओ-आवाज़” में तब के मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने इस नौजवान को स्टेज पर नाचने के लिए हौसला दिया। रफ़ी के मुताबिक़ उन्होंने उसके डांस की तारीफ़ भी की।

बिना तालीम का वो गायक, जिसे जनता ने ताज पहनाया

जिस मुक़ाबले में वह बार-बार डेंजर ज़ोन में पहुँचा, उसी का विजेता बनकर निकला।

हैरत की बात यह है कि क़ाज़ी को गाने की कोई बाक़ायदा तालीम नहीं मिली थी। Fame Gurukul में जजों की तनक़ीद उन पर बरसती रही, वह कई बार डेंजर ज़ोन में पहुँचे, मगर हर बार दर्शकों के वोट उन्हें बचा लाए। हाल ही में वह ख़ुद खुले दिल से मान चुके हैं कि तब वह गायक के तौर पर कच्चे थे। और यही बात उनकी कहानी को ख़ास बनाती है: उनके पास सुरों की महारत से पहले दिलों तक पहुँचने का हुनर था।

20 अक्तूबर 2005 को नतीजा आया और क़ाज़ी, रुपरेखा बनर्जी के साथ, मुक़ाबले के विजेता घोषित हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ हर विजेता को 50 लाख रुपये, एक Sony Music कॉन्ट्रैक्ट और एक Maruti Alto मिली। शो के साथी प्रतिभागियों में अरिजीत सिंह भी थे, जो छठे नंबर पर रहे और आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े प्लेबैक सिंगर्स में गिने गए। दोनों की दोस्ती इतने बरसों बाद भी क़ायम है। बताया जाता है कि अरिजीत ने क़ाज़ी के बिग बॉस सफ़र को खुलकर सराहा और उन्हें अपना “रॉकस्टार” कहा।

उन दिनों ऋतिक रोशन से उनकी तुलना ख़ूब हुई। लंबे बाल, हल्की रंगत की आँखें, कमाल का डांस। लेकिन इस जीत ने सिर्फ़ एक लड़के को नहीं, पूरी घाटी को हौसला दिया। कुछ बरस बाद Indian Idol के ऑडिशन श्रीनगर पहुँचे तो नौजवान गायकों की भीड़ उमड़ पड़ी, और माना गया कि क़ाज़ी की कामयाबी ने उन्हें यक़ीन दिलाया था कि श्रीनगर से भी राष्ट्रीय स्टेज तक रास्ता जाता है।

जो नाम पहली बार में सब कुछ पा लेता है, उसकी असली परीक्षा तब शुरू होती है जब तालियाँ थम जाती हैं।

तालियाँ थमीं, मगर महफ़िलें चलती रहीं

जीत के बाद वाली कहानी आमतौर पर परदे के पीछे चलती है, और क़ाज़ी की भी वहीं चली।

रुपरेखा बनर्जी के साथ उनका एल्बम आया और गाना “Yeh Pal” ख़ूब सुना गया। इसके बाद क़ाज़ी ने लाइव शोज़ की राह पकड़ी। रफ़ी के मुताबिक़ वह अमेरिका, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया तक स्टेज पर पहुँचे। फ़िल्मों के प्रस्ताव भी आए, मगर रफ़ी बताते हैं कि क़ाज़ी छोटे किरदार करने को राज़ी नहीं थे और अच्छे रोल का इंतज़ार करते रहे।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे