क़ाज़ी तौक़ीर: बीस बरस की ख़ामोशी के बाद फिर गूँजा श्रीनगर के उस रॉकस्टार का नाम
Fame Gurukul के विजेता क़ाज़ी तौक़ीर बीस बरस बाद Bigg Boss 20 में कैसे बने रॉकस्टार? श्रीनगर से घर-घर तक की पूरी दास्तान पढ़िए।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
एक बार उनकी तबीयत बिगड़ने वाली अदाकारी साथियों को बुरी लगी और सलमान ख़ान को वीकेंड पर इसे बाक़ायदा सुलझाना पड़ा। कैप्टेंसी टास्क में युंग डीएसए से उनकी तीखी बहस हुई। और हाल ही में अरिशफ़ा ख़ान से हुए झगड़े ने उन्हें इस क़दर थका दिया कि वह गुट से कटकर बैठ गए। फिर हाल की ख़बरों में तबीयत की फ़िक्र भी रही, हालाँकि उनकी टीम के मुताबिक़ वह घर के भीतर हैं और हिस्सा ले रहे हैं। इसी दौरान कनिका मान से “लॉलीपॉप” वाले मज़ाक़ पर सलमान ने उन्हें टोका कि कनिका के असहज होने के बाद उन्हें पीछे हट जाना चाहिए था। और 11 अक्तूबर के वीकेंड का वार में सलमान ने ScoutOP (स्काउटओपी) और युंग डीएसए को क़ाज़ी की बीमारी के दौरान उनके बर्ताव पर आड़े हाथों लिया, Belloria की रिपोर्ट के मुताबिक़।
मगर ग़ौर करने की बात यह है कि इसके बाद उन्होंने क्या चुना। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह “शेख़ क़ाज़ी” का लिबास ओढ़कर लौटे और बैठे-बैठे अपने साथियों के लिए ताज़ा तुकबंदी वाले गीत गढ़ने लगे, और सबको हँसी में एक कर दिया। ग़ुस्सा सबको आता है। फ़र्क़ इससे पड़ता है कि आप उसके बाद दीवार उठाते हैं या सुर छेड़ते हैं।
उनके बचपन के दोस्त शेख़ अनीस की बात ग़ौर करने लायक़ है। उन्होंने कहा कि क़ाज़ी में कोई अकड़ नहीं और वह आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। शायद इसीलिए बीस बरस बाद भी लोग उसे अपना मानते हैं।
शोहरत आवाज़ से मिलती है, मगर टिकती किरदार से है।
वो लौ, जो बुझी ही नहीं थी
जिस लड़के ने टैगोर हॉल में मुन्नी बेगम की ग़ज़ल गुनगुनाई थी, वह उसी रिवायत का वारिस है जिसे जगजीत सिंह ने सादगी के रास्ते हर आम घर तक पहुँचाया था। फ़र्क़ इतना है कि जगजीत ने साज़ और तालीम को साधा, और क़ाज़ी ने जज़्बात और अदा को।
और वापसी के जज़्बे की बात करें तो मोहम्मद शमी की कहानी भी यही कहती है कि हर तूफ़ान इंसान को तोड़ता नहीं, कभी-कभी उसे और पुख़्ता भी कर जाता है। क़ाज़ी भी बीस बरस के सन्नाटे के बाद उसी जज़्बे के साथ लौटे हैं।
बिग बॉस का नतीजा जो भी हो, जीतें या न जीतें, क़ाज़ी तौक़ीर इस सफ़र में वह कमा चुके हैं जो ट्रॉफ़ी भी नहीं देती: एक नई पीढ़ी की मोहब्बत और पुरानी पीढ़ी की यादों को फिर से जगा देना।
और तुम? अगर तुम्हारा कोई ख़्वाब बरसों से किसी कोने में ख़ामोश पड़ा है, तो बस इतना याद रखना। जो चराग़ बुझा हुआ दिखता है, वह अक्सर सिर्फ़ अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा होता है। फ़र्क़ तब पड़ता है जब तुम उसे ख़ुद दोबारा जलाने का हौसला करते हो।
इन्हें भी पढ़िए
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे