फ़ोन कॉल – एक कॉल से परवान चढ़ती मोहब्बत की दास्तान
एक फोन कॉल से शुरू हुई आबान और सनम की कहानी, जो दोस्ती, मोहब्बत, गलतफहमी और एक दर्दनाक सच के बीच बदलती चली जाती है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
कुछ देर बाद सनम का घर आया. वह उतरने से पहले कुछ कहना चाहती थी पर उसकी हिम्मत नहीं हुई. वह कार से उतर गयी तो आबान ने तेज़ी से कार बढ़ा दी. सनम वही खड़े हो के कार को अपने से दूर जाते देखती रही. जैसे वह कार न कोई उसकी रूह को उससे दूर ले जा रहा हो.
सनम घर मे दाखिल हुई और सीधे कमरे मे चली गयी. उसका दिल बेचैन हो रहा था. उसको अपने किए पर अफ़सोस था. उसने सोचा बिना दूसरे इंसान का नजरिया जाने ही उसने आबान को गलत मान लिया और इतना बड़ा गुन्नाह कर डाला। इसमे दोनो ही अपनी जगह सही थे.
वह बस यही सोच रही थी की उसने आबान के साथ ग़लत किया. वह बिना खाना खाये लेट गयी. नींद कोसों दूर थी आँखों से. उसका दिल किया की आबान को कॉल करे या मैसेज करे. पर उसकी हिम्मत नहीं हुई. कई बार उसने कॉल के लिए फ़ोन उठाया, नंबर मिलाने की हिम्मत नहीं हुई. इन्ही सब कश्मकश मैं वह करवटें बदलती रही. और फिर न जाने रात के किस पहर उसको नींद ने आके घेरा।
सुबह उसका दिन काफी देर से शुरू हुवा। उठते ही कल के पुरे दिन का वाक़्या उसकी आँखों के सामने से गुज़र गया. वह फिर कशमकश से घिर गयी. फिर उसने सोचा अभी थोड़ा वक़्त तो देना चाहिए। अभी उसका मूड खराब होगा। है भी तो हिटलर के नान से मशहूर कॉलेज सर्किल में जनाब। उसने सोचा एक दो दिन बाद आबान को कॉल करुँगी और ज़िद करुँगी माफ़ करने को और अगर नहीं माना तो घर पहुंच जाऊँगी। माना की मैंने गलती की है, पर मान भी तो रही हूँ, मना लुंगी मैं आबान को। यह सब सोचने से उसका मूड हल्का हो गया. उसने अपने आपको अपने काम में मसरूफ कर लिया।
एक अधूरी कहानी! | फ़ोन कॉल – मोहब्बत की दास्तान
तीन दिन बीत गए. आबान का कोई कॉल नहीं आया। सनम ने भी अपने दिल को मार के कॉल नहीं की. वह सब्र से काम ले रही थी. यह सोच रही थी शायद आबान का गुस्सा उतरे और वह कॉल करे। हर फ़ोन कॉल पे सनम को सिर्फ आबान का ही इंतज़ार होता था। पर कॉल नहीं आयी.
जब चार दिन बीत गए तो सब्र का बांध टूट गया। उसने आबान को कॉल करी. पर रिप्लाइ नहीं मिला. कई बार कॉल की पर रिंग बजती रही पर किसी ने जवाब नहीं दिया। उसने सोचा शायद वह उसकी कॉल को बाद में रिप्लाई करे, लेकिन आबान का कॉल नहीं आया. सनम परेशान हो गयी.
सनम ने शाम को फिर कॉल की पर अब कॉल करने पर फोन स्विच ऑफ आने लगा. सनम परेशान होने लगी थी। उसको अजीब से ख्याल आने लगे थे. उसने आख़िर में फ़ैसला लिया की वो अब उससे मिलने जयगी. सनम तैयार हुई और आबान के घर जा पहुंसी. दरवाज़ा एक नौकर ने खोला.
सनम – मुझे आबान से मिलना है. घर पर कोई और है क्या. उनकी अम्मी या पापा ?
नौकर – जी घर पर इस वक़्त कोई नहीं है. सब हॉस्पिटल मे हैं. आबान बाबा की तबीयत बिगड़ गयी थी चार दिन पहले.
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे