फ़ोन कॉल – एक कॉल से परवान चढ़ती मोहब्बत की दास्तान
एक फोन कॉल से शुरू हुई आबान और सनम की कहानी, जो दोस्ती, मोहब्बत, गलतफहमी और एक दर्दनाक सच के बीच बदलती चली जाती है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
आबान – मेरा नेचर ऐसा है . प्यार हर कोई चाहता है पर किसी की किस्मत मैं होता है तो किसी की किस्मत मैं नहीं. कुछ को मिलता है तो वो उसको समझ नहीं पाते, और कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चाह कर भी प्यार नहीं कर सकते. उनको ज़िंदगी कई मौके पर प्यार का तोहफा देती है पर वो बदकिस्मत उसको क़ुबूल नहीं कर सकते. उनकी किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती.
सनम – अरे ऐसा भी नहीं होता और किसी की किस्मत इतनी बेकार नहीं होती.
आबान – होता है ऐसा. मैने करीब से महसूस किया है. खैर छोड़ो यह बोरिंग टॉपिक.
आबान ने सफाई से टॉपिक को चेंज किया और फिर वो दोनो एक दूसरे से इधर उधर की बात करने लगे. कोई सुबह के जब फजिर की अज़ान की आवाज़ से उनको पता चला की वक़्त क्या हुवा है.
आबान – चलिए मैं अब नमाज़ पढ़ने जा रहा हूँ. फिर थोड़ा रेस्ट करके ऑफिस जाऊंगा। फिर मिलते हैं जल्दी ही. इन्शाह अल्लाह।
सनम – जी बिलकुल हम आपका इंतेज़्ज़र करेंगे। अल्लाह हाफिज।
यह सिलसिला चल निकला. रोज़ दोनो फोन पर या वेब कॉल पर खूब बात करते। सनम उसको खूब हँसा हँसा के लोट पॉट कर देती। उसके पास किस्से बहुत रहते थे. अउ सब एक से बढ़ कर एक. आबान अब खुश रहने लग था . उसके चेहरे पर ताज़गी रहने लगी. ज़िन्दगी मैं पहली बार उसको एक अलग तरह की खुसी मिल रही थी. ऐसा नहीं था की वह पहले खुश नहीं था. पर यह कुछ अलग एहसास था.
आबान को खुश देख कर उसकी अम्मी बहुत खुश थी. एक सुबह वह उससे बोली हम आप को खुश देख कर काफ़ी अछा महसूस कर रहे हैं. ज़माने हुए जो आप के चेहरे पर यह ताज़गी आए. बेटा हम आपसे रीज़न नहीं पूछेंगे. बस बेटा हम चाहते हैं की आप हमेशा ऐसे ही रहे.
आबान – अम्मी, मैं भी यही चाहता हूँ और यह भी चाहता हूँ की आप भी परेशान न हुवा कीजिये। यह सब किस्मत है और कुछ नहीं। हम सब किस्मत के आगे कुछ नहीं।
आबान की बात मैं हल्का सा दर्द था पर एक सुकून भी था. उसकी अम्मी भी अब सबर कर चुकी थी. जानती थी की सब किस्मत का खेल है. जिसके आगे कुछ ज़ोर नहीं चलता किसी का.
खूबसूरत मुलाक़ात | फ़ोन कॉल – मोहब्बत की दास्तान
आबान ऑफिस मैं था की फ़ोन ने वाइब्रेट करना शुरू किया। देखा तो सनम का कॉल था. उसने कॉल रिसीव किया।
सनम – मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ. क्या तुम हमसे मिलोगे ?
आबान – क्या बात है. आज एक दम से मिलना है. कोई ख़ास बात ? ऐसा क्या हुवा जो हमसे मिलने के लिए इतनी बेताबी ?
सनम – बस यही प्रॉब्लम हैं लड़को का. अपने आप ही उड़ने लगते हैं. बात यह है की आज मम्मी ने घर में खाना हमारी पसंद का नहीं बनाया है. इस लिए मेरी पसंद का खाना तुम मुझे खिलओयगे. बोलो हाँ या ना , वरना मैं तुम्हारा खून पी जाउंगीबिना डकार लिए. मुझे भूक लगी है.
आबान – चुड़ैल आंटी आपका फरमान सिर – आँखों पर. कहाँ आना होगा मुझे यह भी बता दो.
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे