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एक किस्त, एक दास्तान

फ़ोन कॉल – एक कॉल से परवान चढ़ती मोहब्बत की दास्तान

एक फोन कॉल से शुरू हुई आबान और सनम की कहानी, जो दोस्ती, मोहब्बत, गलतफहमी और एक दर्दनाक सच के बीच बदलती चली जाती है।

फोन पर बात करती सनम और दूर बैठे आबान की अधूरी मोहब्बत

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

आबाब – सॉरी असल मैं ज़रा रिज़र्व टाइप का इसनान हूँ. वैसे आप तो कह रही थी की आपको कोई कॉल नहीं करता फ्रेंडशिप के लिए फिर अभी आप कह रही थी की सारे दिन मेसेज आते हैं.

सनम – वो तो मैं आपको भाव दे रही थी की आप कितने जबरदस्त बंदे हो. खैर आप बताइए की आप क्या करते हैं. कहाँ रहते हैं. कितनी गर्लफ्रेंड्स है आपकी एट्सेटरा एट्सेटरा.

आबान सोचने लगा की कमाल की लड़की है. मुझे जानती है ना समझती है. दोस्त होने का दम भर रही है, पर पता नहीं यह दिल इससे बात करना चाहता है.

सनम – अगर आप नहीं बात करना चाहते तो ना सही. इस खूबसूरत बंदी से बात करने वालों की कमी नहीं है. बाइ- बाइ !

और फोन कट गया. आबान अजीब सी कशमकश मे था की यह क्या हुवा. आज तक उसको कभी ऐसा महसूस नहीं हुवा. पता नहीं क्या बात थी इस लड़की की अजीब सी बातों मैं, की आबान जैसे उसकी तरफ झुक गया था. वो उससे बात करना चाहता था. आज वो एक अंजान लड़की से बात करना चाहता था. जिसे वो न तो जनता था ना मिला था.  पर उस लड़की ने सिर्फ़ एक छोटे से कॉल से उसको अपनी तरफ झुका लिया था. आज एक फोन कॉल ने उसको अंदर से हिला दिया.  

उसने फोन उताया और कॉल बॅक किया. कॉल कनेक्ट हुई. पर रिसिव नहीं हुई. करीब सात कॉल्स के बात जब फोन नहीं उठा तो उसने फोन रख दिया. तभी उसके डोर पर नॉक हुवा. उसने दरवाज़ा खोला. तो देखा उसकी अम्मी खड़ी थी.

अम्मी- आबान बेटा आज आप नीचे नहीं आए. सब ठीक है ना ?

माँ भी एक अलग ही नेमत है उपर वाले की. औलाद की फिकर हमेशा रहती है. चाहे वो कितना भी बड़ा क्यूँ ना हो. माँ और उसका दर्जा तभी इस दुनिया मैं सबसे उचा है.

आबान – कुछ बात नहीं है अम्मी. मैं ठीक हूँ. मैं बस एक फोन कर रहा था , जो रिसिव नहीं हो रहा. आप चलिए मैं नीचे आता हूँ. यह बताइए की चाय के साथ अपने फुल्की बनाई हैं न!

अम्मी – मुझे पता है की तुम फुल्की के बगैर बारिश मे चाय नहीं पीते. जल्दी आ जाओ सब त्य्यार है.

फ्रेश हो कर उसने फोन उठाया और नीचे आ गया. अम्मी के साथ उसने शाम की चाय पी. अभी तक वो सनम को दिमाग़ से निकल नहीं पाया था. अजीब लग रहा था उसको. ना उसने कोई ख़ास बात करी फिर भी उसका दिल इस लड़की से बात करना चाहता है.

आबान उठा और उसने अपना कंप्यूटर ऑन किया. कुछ ए-मेल को रिप्लाइ किया. ना जाने क्यूँ उसने अपना फ़ेसबुक अकाउंट लोजीन किया. शायद जबसे उसका प्रोफाइल बना था तब से एक या दो बार ही गया होगा साइट पे. कई फ्रेंड रिक्वेस्ट्स थी. एक प्रोफाइल पर वो रुका. प्रोफाइल एक लड़की की थी. नाम था सनम. कुछ तीस मिनिट्स पहले रिक्वेस्ट आई थी. एक खूबसूरत लड़की की फोटो लगी थी. उसने रिक्वेस्ट आक्सेप्ट कर लिया.

कुछ देर बाद उसने फिर फोन उठाया. कॉल किया और फोन रिसिव हो गया.

आबान – हेलो आप सनम बोले रही हैं ?

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे