फ़ोन कॉल – एक कॉल से परवान चढ़ती मोहब्बत की दास्तान
एक फोन कॉल से शुरू हुई आबान और सनम की कहानी, जो दोस्ती, मोहब्बत, गलतफहमी और एक दर्दनाक सच के बीच बदलती चली जाती है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
सनम का दिल धक् से हो गया। वह घबरा गयी पर अपने को सँभालते हुवे बोली – क्या आप मुझे बता सकते है की वो कहाँ एडमिट हैं.
नौकर बोला – सिटी हॉस्पिटल में एडमिट हैं वह.
सिटी हॉस्पिटल का एड्रेस ले कर सनम जल्दी से हॉस्पिटल पहुँची. रिसेप्षन पर आबान के रूम का पता कर के वो भागती हुई उसके रूम के पास पहुंची। बाहर आबान की अम्मी खड़ी थी। सनम को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे या क्या न करे. उसकी बदहवासी देख आबान की अम्मी उससे खुद मुख़ातिब हुई और बोली बेटा आप ठीक तो हो किसको ढूंढ रही हो ?
सनम – आंटी मैं अपने एक दोस्त आबान को धुंध रही हूँ. रूम तो यहीं बताया था. उसकी तबियत खराब है.
अम्मी बोली – बेटे मैं आबान की अम्मी हूँ. पर उसने कभी आपका ज़िक्र नहीं किया। खैर आबान जो अपने आखरी दीनो मैं फिर से हँसने लगा था, शायद उसकी वजह आप हैं. हम आपका यह अहसान कभी नहीं भूलेंगे। कहते हुवे उनका गला भर गया.
सनम – यह आप कैसी बात कर रही हैं. आंटी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. आबान ठीक तो है ना! प्लीज मुझे उससे मिलना है। सनम को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है. अम्मी क्यों ऐसी बात कर रही हैं।
अम्मी सनम को रूम मैं ले आई. अंदर का मंज़र बड़ा खराब था. आबान चारो तरफ से लाइफ सेवर डेविसेस से घिरा था और आँखें बंद थी उसकी। सनम शॉक्ड थी की यह हो क्या रहा है. वो आगे बढ़ी और आबान के पास बैठ गयी. सनम की आंखों मैं आँसूं बढ़ने लगे और वह रोने लगी। मोहब्बत में एक ताक़त होती है. उसके टपकते आंसूं जब आबान के हाथों पे पड़े तो उसने आँखे खोली और उसने सनम के रोते देखा तो मुस्कुराते हुवे बोला.
आबान – आपका चेरा इन आसुओं के लिए नहीं बना. चुड़ैल आंटी, चुप हो जाइए आप. आप की कोई ग़लती नहीं है. यह मेरी किस्मत मैं लिखा है.
सनम रोती रही और बोली – यह तुमको क्या हो गया. क्या यह सब मेरी वजह से हुवा है. प्ल्ज़ मुझे बताओ।
सनम रोने लगी. उसकी आँखें भीग गयी. मोहब्बत एक अनोकी चीज़ होती है. आबान होश मैं आने लगा.
आबान – इसमें किसी की गलती नहीं है और जो कुछ उस शाम हुवा वह बस हालात थे। किसी की कोई गलती नहीं थीं।
सनम – नहीं मैं नहीं मानती। मैंने गलत किया। जो भी किया।
आबान – रहने दीजिये सनम, मेरे दिल में अब कोई गिला नहीं है किसी के लिए। मैंने सबको बख्श दिया है.
सनम – यह क्या कह रहे हो तुम ! कैसी बातें कर रहे हो, इस तरह की बात न करो प्लीज !
आबान – सनम जो होना है वह तो होके रहता है। आपको याद है की एक बार मैने आप से कहा था की कुछ लोगों की ज़िंदगी मैं मोहब्बत दस्तक देती है और वो उसको अपनी ज़िंदगी मैं चाह कर भी क़ुबूल कर सकते. अपने कहा ऐसा नहीं होता. इतना बदनसीब कोई नहीं होता. लेकिन मैं वो बदनसीब हूँ. मैं मोहब्बत और पता नहीं ज़िंदगी के कितने ऐसे लम्हे क़ुबूल नहीं कर सकता. मुझे मालूम है की मैने हिना का दिल तोड़ा और फिर न चाहते हुवे आज तुम्हारा भी तोड़ दिया।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे