दानिश अलीगड़ी: जिनकी ग़ज़ल सबने सुनी, पर नाम बहुत कम लोगों ने
दो जवाँ दिलों का ग़म के शायर दानिश अलीगड़ी कौन थे? अलीगड़ से उनके शेरों के तीन रंग और हुसैन बंधुओं की आवाज़ तक की कहानी पढ़िए।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
विरासत
आवाज़ को सब पहचानते हैं, क़लम को पहचानना हमारा काम है।
जिस तरह साहिर लुधियानवी ने फ़िल्मी गीतों में अपना अलग लहजा बनाया, उसी तरह दानिश अलीगड़ी ने ग़ज़ल में रोज़ की चीज़ों को गवाह बनाकर अपना अलग सागर खड़ा किया। अगली बार कोई ग़ज़ल सुनो, तो सिर्फ़ गाने वाले का नाम मत देखना, लिखने वाले का नाम भी तलाशना।
तुम अगर कभी किसी ग़ज़ल पर अकेले रोए हो, तो उस ख़ामोश शायर को शुक्रिया कह देना जिसने तुम्हारे लिए लफ़्ज़ लिखे थे। वो नाम अब तुम्हें मालूम है: दानिश अलीगड़ी।
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आपके ज़ेहन के सवाल
दानिश अलीगड़ी कौन थे?
दानिश अलीगड़ी उर्दू के शायर थे, जिनका जन्म 1931 में अलीगड़ में हुआ। उनकी लिखी ग़ज़ल दो जवाँ दिलों का ग़म हुसैन बंधुओं की आवाज़ में सुनी जाती है।
दानिश अलीगड़ी का तख़ल्लुस क्या है?
उनका तख़ल्लुस दानिश है, जो हर ग़ज़ल के आख़िरी शेर (मक़्ते) में आता है।
दानिश अलीगड़ी की किताब कौन सी है?
उनकी किताब क़लम का सफ़र 1979 में आई।
दानिश अलीगड़ी के उस्ताद कौन थे?
सबा अफ़ग़ानी उनके उस्ताद बताए जाते हैं।
दानिश अलीगड़ी की सबसे मशहूर ग़ज़ल कौन सी है?
दो जवाँ दिलों का ग़म, जिसे अहमद और मोहम्मद हुसैन ने अपने एल्बम अब छलकते हुए सागर में गाया।