दर-ए-इश्क़: मोहब्बत और खौफ़ की दास्तान
लखनऊ की रहस्यमयी हवेली, सुर्खाब की रूह और आशेर की मोहब्बत की ऐसी दास्तान, जहां इश्क़ और खौफ़ आमने-सामने खड़े हैं।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
“शायद वह इंसान तुम्हारे लायक नहीं था, सुर्खाब। लेकिन अब मैं यहाँ हूँ। मैं तुम्हारे दर्द को महसूस कर सकता हूँ।”
सुर्खाब ने उसे पहली बार मोहब्बत भरी नज़र से देखा। उसकी उदासी से भरी आंखों में हल्की चमक आई। उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान उभरी, लेकिन वह मुस्कान अधूरी थी।
“क्या तुम सच में मेरे दर्द को समझ सकते हो, आशेर? अगर हाँ, तो तुम्हें मेरी मोहब्बत का इम्तिहान देना होगा।”
आशेर ने सुर्खाब से कहा “बताओ, मुझे किस इम्तेहान का सामना करना पड़ेगा। तुम्हरे लिए में वह करूँगा ।”
सुर्खाब ने कहा आशेर “अभी वक़्त नहीं आया है, बस तुमको कुछ दिन यहाँ रोज़ आना होगा।”
आशेर ने कहा “क्यों आज और अभी क्यों नहीं?”
इसपर सुर्खाब ने मुस्कुराते हुवे कहा ” एक बार यह दिल टूट चूका है आशेर, इस दिल में बरसों का दर्द है और उस धोके के ज़ख़्म हैं। एक मुलाक़ात में कैसे भर पाएंगे यह ज़ख्म।
अगले कुछ दिनों में, आशेर बार-बार हवेली आने लगा। उसे अब वहां डर नहीं लगता था। उसकी मुलाकातें सुर्खाब से लंबी होती गईं। सुर्खाब हर रोज़ हवेली के नए कोने की कहानी सुनाती। हर दीवार, हर दरवाजा, हर कमरा जैसे किसी अधूरी मोहब्बत का गवाह था।
"मैंने इश्क़ किया, पर सिला क्या पाया?
मोहब्बत के बदले बस दर्द कमाया।
अब रूह की परछाईं हूँ,
किसी के ख्वाबों की परतें हूँ।"
“यह जगह मेरी यादों का मकबरा है,” सुर्खाब ने एक दिन कहा।
“लेकिन तुम इतनी उदास क्यों हो, सुर्खाब? अब तो मैं तुम्हारे साथ हूँ।” आशेर ने उसके पास बैठते हुए कहा।
सुर्खाब ने गहरी सांस भरी। “मोहब्बत का धोखा दिल में ऐसा जख्म छोड़ता है, जो शायद कभी नहीं भरता। मैं अब भी उसी का इंतजार कर रही हूँ। लेकिन शायद… शायद तुम्हारी मौजूदगी मुझे एक नई उम्मीद दे रही है।”
आशेर खुद को रोक नहीं पा रहा था। उसके दिल में सुर्खाब के लिए जज्बात पैदा हो रहे थे। वह सुर्खाब को देखकर सोचता, “क्या कोई इतना खूबसूरत होते हुए भी इतना उदास हो सकता है?”
लेकिन इन जज्बातों के साथ एक डर भी था। वह यूसुफ़ की चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता था।
“भाई,” यूसुफ़ ने एक दिन गुस्से में कहा, “तुम उस लड़की के जादू में फंस चुके हो। ये मोहब्बत नहीं है। ये पागलपन है! वो तुम्हें मौत के मुंह में ले जा रही है।”
“यूसुफ़, तुम नहीं समझोगे। ये मोहब्बत है। यह सच्ची है।”
“सच्ची मोहब्बत?” यूसुफ़ ने हंसते हुए कहा। “यह लड़की इंसान नहीं है! वह तुम्हारे जज्बातों का इस्तेमाल कर रही है।”
लेकिन आशेर ने यूसुफ़ की बातों पर ध्यान नहीं दिया।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे