साहिर लुधियानवी: जिसने हर घर में मोहब्बत की रोशनी की और ख़ुद उम्र भर परछाइयाँ से घिरा रहा
लफ़्ज़ों का जादूगर, जिसकी नज़्म गीत बनी। लुधियाना की हवेली से बंबई तक का सफ़र। वो साहिर लुधियानवी था।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
उनका मशहूर मजमूआ तल्ख़ियाँ है, जो लगभग 1945 में छपा। परछाइयाँ और आओ कोई ख़्वाब बुनें भी उनकी पहचान है।