आख़िरी कॉल: एक अधूरी मोहब्बत का इंसाफ़
मौत के बाद भी अगर मोहब्बत कोई रास्ता ढूँढ ले, तो कैसा हो? रेहान और ज़ोया की एक ऐसी दास्तान, जिसमें एक आख़िरी कॉल ने पूरे राज़ को बेनक़ाब कर दिया। पढ़िए।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
कहते हैं मौत सबसे बड़ी सच्चाई है, कि जो चला गया, वो कभी लौटकर नहीं आता। एक बात कहूँ? ये पूरा सच नहीं है। कुछ मोहब्बतें इतनी गहरी होती हैं कि मौत भी उनके आगे हार जाती है, और वो अपना रास्ता ख़ुद ढूँढ लेती हैं, चाहे उसके लिए क़ब्र की ख़ामोशी को भी तोड़ना पड़े। ये कहानी है रेहान और ज़ोया की, एक ऐसी मोहब्बत की जिसने साबित कर दिया कि कुछ रिश्ते सिर्फ़ ज़िंदगी की मोहताज नहीं होते।
“मोहब्बत जब सच्ची हो, तो मौत भी उसके सामने बस एक ठहराव बनती है, अंत नहीं।”
एक सादी सी ज़िंदगी
रेहान और ज़ोया की शादी को अभी बस एक बरस ही हुआ था। रेहान एक मल्टीनेशनल बैंक में दिन-रात मेहनत करता, ज़ोया घर की दहलीज़ पर उसका इंतज़ार करती। ज़िंदगी बहुत तामझाम वाली नहीं थी, न शोहरत थी, न दौलत का अंबार, बस दो दिल थे जो एक-दूसरे की धड़कन में जीते थे। रेहान अक्सर ज़ोया का हाथ थामकर कहता, “ताउम्र सिर्फ़ तुमसे मोहब्बत करूँगा, और मेरी ज़िंदगी में कोई और नहीं आएगा।” ज़ोया हँस देती, जैसे इतना यक़ीन एक दिल के लिए कुछ ज़्यादा ही हो।
फिर एक दिन बैंक से हुक्म आया, रेहान को मुंबई जाना होगा, किसी ज़रूरी ऑडिट के सिलसिले में। ज़ोया का दिल न जाने क्यों उस दिन बेवजह घबरा रहा था, जैसे किसी अनदेखे ख़तरे की आहट पहले ही उसकी रूह तक पहुँच चुकी हो। “मत जाओ,” उसने कहा था, बिना किसी वजह के, बस एक डर के साथ। रेहान हँस पड़ा, “काम ज़रूरी है ज़ोया, बस दो दिन की बात है, फिर मैं तुम्हारे पास होऊँगा।” उसे नहीं पता था कि ये वादा उसका आख़िरी वादा साबित होने वाला है।
वो आख़िरी रात
मुंबई में रेहान का काम ख़त्म हो चुका था। रात के ग्यारह बज रहे थे, और अगली सुबह की फ़्लाइट उसे वापस ज़ोया के पास ले जाने वाली थी। हाईवे पर सन्नाटा पसरा था, बस स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी अंधेरे को चीरती हुई सड़क पर बिखरी पड़ी थी।
गाड़ी चलाते-चलाते रेहान ने फ़ोन उठाया, ज़ोया का नंबर लगाया। स्क्रीन पर “Calling…” दिखता रहा, पर कॉल कनेक्ट नहीं हुई, नेटवर्क वहाँ बेहद कमज़ोर था। उसने फ़ोन एक पल देखा, फिर हल्के से मुस्कुराकर रख दिया। “कल सुबह तक, फिर सीधा उसके सामने होऊँगा,” उसने मन ही मन सोचा, और ज़ोया का चेहरा उसकी आँखों के सामने उतर आया।
तभी पीछे से एक गाड़ी की तेज़ रोशनी उसकी आँखों में चुभी। मिरर में देखा तो एक बड़ी SUV बेहद रफ़्तार से क़रीब आ चुकी थी। रेहान ने अपनी गाड़ी थोड़ी साइड कर दी, रास्ता देने के लिए। पर SUV ने रास्ता नहीं लिया, वो सीधा उसकी गाड़ी से आ टकराई।
गाड़ी सड़क से बाहर छिटककर सीधे एक खंभे से जा टकराई। शीशे बिखरने की चीख़, धातु के मुड़ने की चरचराहट, और फिर एक भयानक ख़ामोशी।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे