दिलीप कुमार: जिसकी एक ख़ामोशी पर आज भी पूरा बॉलीवुड अदब से सर झुकाता है
हिंदुस्तानी सिनेमा का सबसे बड़ा अदाकार, जिसने अपने ही गम से हारकर भी आठ फ़िल्मफेयर अवॉर्ड जीते। पढ़िए दिलीप कुमार की पूरी दास्तान।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
1954 में शुरू हुए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स के पहले ही साल, दिलीप कुमार को “दाग़” के लिए बेस्ट एक्टर का पहला अवॉर्ड मिला, वो इस श्रेणी के पहले ही विजेता बने। इसके बाद “आज़ाद”, “देवदास”, “नया दौर”, “कोहिनूर”, “लीडर”, “राम और श्याम” और “शक्ति”, कुल आठ बार, दिलीप कुमार बेस्ट एक्टर बने। ये रिकॉर्ड आज तक कोई अकेला नहीं तोड़ पाया, बरसों बाद शाहरुख़ ख़ान ने बराबरी की, मगर पीछे कोई नहीं छोड़ पाया।
1960 में “मुग़ल-ए-आज़म” में सलीम का किरदार निभाकर दिलीप कुमार ने साबित किया कि “ट्रेजेडी किंग” सिर्फ़ आँसुओं तक महदूद नहीं है, वो एक शहज़ादे के ग़ुरूर और बग़ावत को भी उतनी ही ख़ामोश ताक़त से जी सकता है।
एक दूसरी पारी, एक नया इश्क़
1970 के दशक में दिलीप कुमार का सितारा थोड़ा मद्धम पड़ा, राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का दौर शुरू हो चुका था। पाँच साल का ब्रेक लेकर, 1981 में “क्रांति” से उन्होंने ज़बरदस्त वापसी की, और “शक्ति” (1982), “सौदागर” (1991) जैसी फ़िल्मों में अपना लोहा फिर मनवाया।
1966 में, चवालीस साल की उम्र में, दिलीप कुमार ने बाईस साल छोटी अदाकारा सायरा बानो से शादी की। सायरा ख़ुद बताती थीं कि वो बारह साल की उम्र से ही दिलीप कुमार से शादी करने का सपना देखती थीं। ये शादी पचपन साल तक चली, दिलीप कुमार के आख़िरी सफ़र तक। बीच में, 1981 में, दिलीप कुमार ने एक दूसरी शादी भी की, आसमा रहमान से, जिसे उन्होंने बाद में अपनी आत्मकथा में “एक बड़ी ग़लती” कहा। ये शादी 1983 में टूट गई, और सायरा बानो के साथ उनका रिश्ता आख़िर तक और मज़बूत होता गया। दोनों की कोई औलाद नहीं थी।
आख़िरी सफ़र
ज़िंदगी के आख़िरी बरसों में तबीयत लगातार नासाज़ रहने लगी। जुलाई 2021 में साँस की तकलीफ़ की वजह से दो बार अस्पताल में भर्ती हुए। 7 जुलाई 2021 की सुबह, मुंबई के पी.डी. हिंदुजा अस्पताल में, एक लंबी बीमारी के बाद, दिलीप कुमार का निधन हो गया, उम्र 98 साल।
तिरंगे में लिपटे उनके जनाज़े को पुलिस बैंड के साथ पूरे राजकीय सम्मान से विदाई दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “हमारी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक बड़ा नुक़सान” बताया। अमिताभ बच्चन ने सिर्फ़ इतना लिखा, “एक इदारा चला गया।” सायरा बानो, जो पचपन साल तक उनके साथ रहीं, बरसों बाद भी कहती हैं कि वो “इस जन्म में भी, अगले जन्म में भी” उनके साथ हैं।
विरासत | Legacy
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे