जलालुद्दीन रूमी: जुदाई से जन्मी मोहब्बत की शायरी
शम्स-ए-तबरेज़ी की जुदाई ने मौलाना रूमी को दुनिया का सबसे बड़ा प्रेम-कवि बना दिया। जानिए उनकी दास्तान, जो सात सौ साल बाद भी दिलों को छूती है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
“जो दर्द किसी शख़्स के जाने से मिलता है, वही दर्द कभी-कभी लफ़्ज़ों को वो ज़बान दे देता है, जो सदियों तक गूँजती रहती है।”
रूमी ने कभी अपनी शायरी शोहरत के लिए नहीं लिखी। वो तो बस अपने अंदर के उस ख़ालीपन को भरने की कोशिश कर रहे थे, जो शम्स के जाने से पैदा हुआ था। और शायद यही वजह है कि उनकी हर सतर आज भी इतनी सच्ची लगती है, क्योंकि वो शोहरत के लिए नहीं, बल्कि दर्द से निकली थी।
और तुम, जो ये कहानी पढ़ रहे हो, इतना याद रखना: ज़िंदगी में जो जुदाई तुम्हें सबसे ज़्यादा तोड़ती है, हो सकता है वही जुदाई तुम्हारे अंदर वो हुनर जगा दे जो तुम्हें ख़ुद भी नहीं पता था कि तुम्हारे अंदर है। गलत और सही के पार, एक मैदान है, रूमी वहीं तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।
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