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अमर हस्तियाँ

माधुबाला: जिसकी एक झलक पर आज भी हज़ारों दिल धड़क उठते हैं

बॉलीवुड की सबसे ख़ूबसूरत मगर सबसे तनहा अभिनेत्री, जिसका दिल पर्दे पर धड़कता रहा और हक़ीक़त में टूटता रहा। जानिए माधुबाला की पूरी दास्तान।

माधुबाला: हुस्न ऐसा कि आज भी हर नौजवान दिल उसी की धड़कन पर जीता है

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

माधुबाला ने इस राज़ को दुनिया से छुपाए रखा। कैमरे के सामने वही मुस्कान, वही अदा, वही जादू। सिर्फ़ कुछ अपने जानते थे कि हर शॉट के बाद वो साँस के लिए तड़प रही होती थीं।

मुग़ल-ए-आज़म, दर्द में डूबा एक मास्टरपीस

के. आसिफ़ का सपना, “मुग़ल-ए-आज़म”, पंद्रह साल में बनकर तैयार हुआ, 1944 से 1960 तक। माधुबाला ने अनारकली का किरदार निभाया, ऐसा किरदार जिसमें हक़ीक़त और अभिनय की सरहदें धुंधली पड़ गईं। जिस “शीशमहल” के सेट पर “प्यार किया तो डरना क्या” फ़िल्माया गया, वहीं माधुबाला बार-बार बेहोश होती रहीं, और बार-बार उठकर वापस कैमरे के सामने खड़ी होती रहीं।

फ़िल्म रिलीज़ हुई, अपने वक़्त की सबसे बड़ी कमाई करने वाली हिंदुस्तानी फ़िल्म बनी, और आज भी हिंदुस्तानी सिनेमा की सबसे बड़ी कृतियों में गिनी जाती है। इस परफ़ॉर्मेंस के लिए माधुबाला को करियर का पहला और आख़िरी फ़िल्मफ़ेयर नामांकन मिला, बेस्ट एक्ट्रेस के लिए। अवॉर्ड गया बीना राय के हाथ, “घूँघट” के लिए।

बाईस साल के करियर में, बहत्तर से ज़्यादा फ़िल्मों में, माधुबाला ने कभी कोई फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड नहीं जीता। एक भी नहीं। और फिर भी, आज उनका नाम उन सबसे ऊपर लिया जाता है जिन्होंने ट्रॉफ़ियाँ जीतीं।

किशोर कुमार, इश्क़ नहीं वादा

दिलीप कुमार से बिछड़ने के बाद माधुबाला का दिल कहीं भी नहीं लगा, ऐसा उनकी बहन मधुर बृजभूषण ने बरसों बाद बताया। 1960 में, जब माधुबाला लंदन इलाज के लिए जाने की तैयारी कर रही थीं, किशोर कुमार ने उन्हें शादी का प्रस्ताव दिया। पिता ने डॉक्टरों की राय का इंतज़ार करने को कहा, मगर शादी हो गई।

शादी के दस दिन बाद ही किशोर कुमार माधुबाला को लंदन ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने जो कहा, वो किसी सदमे से कम नहीं था, “दिल पूरी तरह ख़त्म हो चुका है, दो साल से ज़्यादा नहीं बचेगी।”

किशोर कुमार ने बरसों बाद पत्रकार प्रीतीश नंदी को बताया था, “वो एक अलग ही मामला थी। मुझे पता था वो बहुत बीमार है, शादी से पहले ही। मगर वादा तो वादा है, इसलिए मैंने अपना वादा निभाया और उसे अपनी बीवी बनाकर घर ले आया।” शादी एक वादे पर टिकी थी, इश्क़ पर नहीं, और वक़्त के साथ ये फ़र्क़ साफ़ होता गया। किशोर कुमार का अपना बड़ा संयुक्त परिवार था, और माधुबाला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। दोनों धीरे-धीरे अलग रहने लगे, माधुबाला अपने बांद्रा वाले घर में, एक नर्स और ड्राइवर के सहारे।

आख़िरी सफ़र

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