माधुबाला: जिसकी एक झलक पर आज भी हज़ारों दिल धड़क उठते हैं
बॉलीवुड की सबसे ख़ूबसूरत मगर सबसे तनहा अभिनेत्री, जिसका दिल पर्दे पर धड़कता रहा और हक़ीक़त में टूटता रहा। जानिए माधुबाला की पूरी दास्तान।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
सोचिए ज़रा, एक चौदह साल की लड़की, जिसका असली नाम मुमताज़ था, अचानक एक नए नाम के साथ पर्दे पर उतरती है, और वही नाम आने वाले दशकों में करोड़ों दिलों की धड़कन बन जाता है।
1947 में “नील कमल” में राज कपूर के साथ पहला लीड रोल मिला, निर्देशक किदार शर्मा के भरोसे पर। इसी दौर में मुमताज़ का नाम बदलकर माधुबाला रखा गया, यानी “शहद की तरह मीठी लड़की”। इस नाम के पीछे की कहानी थोड़ी अलग-अलग बताई जाती है, कुछ के मुताबिक़ एक क़रीबी दोस्त की सलाह पर, तो कुछ के मुताबिक़ बॉम्बे टॉकीज़ की देविका रानी के कहने पर। मगर नतीजा एक ही निकला, माधुबाला का जन्म।
असली मुक़ाम मिला 1949 में “महल” से, एक रहस्य-रोमांस फ़िल्म, जिसमें “आएगा आनेवाला” गाना और माधुबाला का हौंटिंग किरदार, दोनों ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। सोलह साल की उम्र में माधुबाला हिंदुस्तान की सबसे चर्चित नई अदाकारा थीं।
दिलीप कुमार, नौ साल का इश्क़
1951 में “तराना” के सेट पर माधुबाला की मुलाक़ात दिलीप कुमार से हुई। दोनों ने साथ में “संगदिल”, “अमर” और बाद में “मुग़ल-ए-आज़म” जैसी फ़िल्में कीं, और सेट के बाहर भी एक-दूसरे के क़रीब आते गए। रिश्ता इतना गहरा हुआ कि सगाई तक बात पहुँची, दिलीप कुमार की बहन ख़ुद चुन्नी लेकर आईं, जैसा रिवाज होता है।
नौ साल तक ये इश्क़ चला। मगर तक़दीर को कुछ और ही मंज़ूर था।
नया दौर की वो अदालत
जानिए, इश्क़ कैसे एक अदालत में टूट गया। 1956-57 में बी.आर. चोपड़ा की फ़िल्म “नया दौर” के लिए माधुबाला को भोपाल आउटडोर शूट पर जाना था। उनके पिता अताउल्लाह ख़ान को ये सफ़र ख़तरनाक लगा, क्योंकि पास ही किसी और फ़िल्म की शूटिंग के दौरान एक भीड़ ने औरतों के साथ बदसुलूकी की थी। पिता ने माधुबाला को जाने से रोक दिया।
चोपड़ा ने अनुबंध तोड़ने का मुक़दमा दायर कर दिया। अदालत में दिलीप कुमार ने चोपड़ा के पक्ष में गवाही दी, माधुबाला और उनके पिता के ख़िलाफ़। मुक़दमा महीनों चला, और जिस रिश्ते को नौ साल की मोहब्बत ने सींचा था, वो एक अदालती कमरे में दम तोड़ गया। फ़िल्म में माधुबाला की जगह वैजयंतीमाला को ले लिया गया।
वो राज़ जो दिल में दबा रहा
1954 में, “बहुत दिन हुए” की शूटिंग के दौरान, माधुबाला को अचानक ख़ून की उल्टी हुई। दिलीप कुमार ख़ुद मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रुस्तम जल वकील को बुला लाए। जाँच में पता चला, माधुबाला के दिल में एक छेद था, वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफ़ेक्ट। ये ख़बर उस वक़्त की सबसे ख़ूबसूरत, सबसे कामयाब अदाकारा के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे