मुश्ताक़ ख़ान: वो बल्लू जिसने एक सीन में पूरी फ़िल्म लूट ली
वेलकम के बल्लू मुश्ताक़ ख़ान अब नहीं रहे। बैहर से बंबई, ग़दर से अपहरण की उस सुबह तक, एक अनदेखे फ़नकार की पूरी दास्तान पढ़िए।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
बस। इतना काफ़ी था। थिएटर में ठहाके गूँजे, और उन्नीस साल बाद भी यह सीन सोशल मीडिया पर मीम्स की शक्ल में घूम रहा है। कई दशकों की मेहनत का फल एक सीन में मिलता है, बशर्ते उस सीन में आप अपनी पूरी ज़िंदगी का तजुर्बा झोंक दें।
यही है हमारी इस दास्तान का असल मोटिफ़: वो साइड हीरो, जो आया और सारी रौनक़ लूट ले गया।
‘वेलकम’ के डायरेक्टर अनीस बज़्मी ने उनके जाने पर लिखा कि वो मुश्ताक़ भाई के इंतिक़ाल की ख़बर से सदमे में हैं और कुछ बोल नहीं पा रहे, और उन्हें “my balu” (मेरा बल्लू) कहकर याद किया। उन्होंने उन्हें एक बेहतरीन फ़नकार और एक ख़ूबसूरत रूह बताया। सोचिए, सत्रह-अठारह साल बाद भी एक डायरेक्टर के दिल में वो किरदार उसी नाम से ज़िंदा था।
किरदार की लंबाई नहीं, उसकी गहराई तय करती है कि वो कितने बरस ज़िंदा रहेगा।
पर्दे से परे: टीवी, कॉमेडी और नई पीढ़ी
बड़े पर्दे के अलावा मुश्ताक़ ख़ान टीवी की दुनिया में भी उतने ही सहज थे।
टीवी शो ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ में उन्होंने बलदेव त्रिपाठी का किरदार निभाया, और ‘अदालत’ में भी नज़र आए। ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘राउडी राठौर’ जैसी फ़िल्मों में उनकी मौजूदगी हर बार एक मुस्कुराहट की ज़मानत होती थी।
और उम्र के इस पड़ाव पर भी वो रुके नहीं। 2024 में ‘स्त्री 2’ आई, और एक नई पीढ़ी ने भी उन्हें देखा। 2025 और 2026 में भी उनकी कई फ़िल्में रिलीज़ हुईं, जिनमें ‘हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं’ भी शामिल है। कैमरा उनका पहला प्यार था, और आख़िरी दम तक रहा।
वो बारह घंटे: जब असल ज़िंदगी फ़िल्म से भी डरावनी बन गई
अब लौटते हैं उसी सुबह पर, जहाँ से यह दास्तान शुरू हुई थी।
अक्टूबर 2024 में मुश्ताक़ ख़ान को एक फ़ोन आया। मेरठ में एक अवॉर्ड शो है, आपको बुलाना है। पुलिस के मुताबिक़, आयोजक बनकर आए शख़्स ने 25 हज़ार रुपये एडवांस और हवाई टिकट भेजा। सब कुछ बिल्कुल असली लग रहा था।
20 नवंबर 2024 को वो दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। एक कैब ड्राइवर उन्हें लेने आया और दिल्ली-मेरठ के बीच एक मशहूर शिकंजी की दुकान पर ले गया। वहाँ उन्हें ज़बरदस्ती दूसरी गाड़ी में बिठाया गया, और तब बताया गया कि उन्हें अग़वा कर लिया गया है।
उन्हें बिजनौर ले जाया गया। क़रीब बारह घंटे क़ैद रखा गया, उनके साथ मारपीट की गई, और एक करोड़ रुपये की फ़िरौती माँगी गई। उनके और उनके बेटे के बैंक खातों से लगभग दो लाख रुपये से ज़्यादा निकाल लिए गए।
फिर आई वो सुबह। अग़वाकार नशे में सो रहे थे, अज़ान की आवाज़ आई, और मुश्ताक़ ख़ान भाग निकले। मस्जिद पहुँचे, मोहल्ले वालों ने उनके घर वालों से संपर्क किया और वो सही-सलामत घर लौट आए।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे