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एक किस्त, एक दास्तान

रकीबनामा: दो दुश्मनों की दास्तान

एक तूफ़ानी रात में दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी बर्फ़ में फंस जाते हैं, और सामने आता है तीन साल पुराना एक ऐसा सच जिसने दोनों की ज़िंदगी बदल दी।

अलीज़ा और दानिश बर्फ़ीले तूफ़ान में पीठ से पीठ सटाए खड़े, तूफ़ान में दो अजनबी कहानी

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

उस दिन दोनों एजेंसियाँ अपने-अपने ग्रुप लेकर अलग-अलग ट्रेल पर निकली थीं, हमेशा की तरह एक दूसरे से नज़रें चुराते हुए। दोपहर तक आसमान साफ़ था। फिर अचानक, बिना किसी चेतावनी के, बादल इस तरह उतरे जैसे पहाड़ों ने ख़ुद अपनी चादर बदल ली हो। कुछ ही मिनटों में बर्फ़ीला तूफ़ान शुरू हो गया, और साथ ही एक ऐसी आवाज़ आई जिसने पूरे इलाके को थर्रा दिया।

ऊपर की एक बर्फ़ीली चट्टान का कगार, हफ्तों की जमी बर्फ़ के बोझ से, अचानक टूटकर नीचे की तरफ़ गिरने लगा। छोटा हिमस्खलन था, मगर उतना काफ़ी था। अलीज़ा के ग्रुप का सबसे छोटा ट्रेकर, अठारह साल का आर्यन, उस बहाव की चपेट में आकर पगडंडी से नीचे लुढ़क गया।

“आर्यन!” अलीज़ा की चीख़ पूरी वादी में गूँज गई। उसने बाक़ी ग्रुप को फ़ौरन एक साथी गाइड के हवाले किया और ख़ुद बर्फ़ में धँसते हुए नीचे की तरफ़ भागी। दूसरी तरफ़, दानिश का ग्रुप उसी रास्ते के क़रीब था। बर्फ़ खिसकने की आवाज़ और चीख़ सुनकर दानिश ने भी अपने ग्रुप को साथी गाइड के साथ आगे भेजा और ख़ुद पीछे की तरफ़ दौड़ा, बिना यह जाने कि कौन फंसा है, बिना यह सोचे कि वो किस एजेंसी का ट्रेकर है।

बर्फ़ के नीचे

जब दोनों वहाँ पहुँचे, आर्यन कमर तक बर्फ़ में दबा हुआ था, एक हाथ बाहर, चेहरा नीला पड़ता जा रहा था। “साँस ले रहा है!” दानिश चिल्लाया, हाथों से बर्फ़ हटाते हुए। अलीज़ा ने बिना एक पल गँवाए अपने दस्ताने उतार दिए और नंगे हाथों से खोदना शुरू कर दिया, ठंड से उँगलियां सुन्न पड़ने लगीं, मगर उसने रुकने का नाम नहीं लिया।

“धीरे, बर्फ़ के नीचे उसका पैर फँसा हो सकता है, ज़ोर मत लगाओ,” दानिश ने चेताया। दोनों साथ साथ, बिना एक लफ़्ज़ की बहस के, बर्फ़ की तह दर तह हटाते गए, जब तक आर्यन को बाहर नहीं निकाल लिया। उसकी साँसें उखड़ी हुई थीं, मगर वो ज़िंदा था।

“शुक्र है,” अलीज़ा ने राहत की एक लंबी साँस ली, फिर दानिश की तरफ़ देखा, जैसे पहली बार एहसास हुआ हो कि वो किसके साथ मिलकर खोद रही थी। दोनों की आँखों में एक पल के लिए हैरानी और शर्मिंदगी दोनों तैर गईं।

रस्सी टूटने से पहले

अब सवाल यह था कि आर्यन को लेकर सुरक्षित जगह कैसे पहुँचें। सबसे नज़दीकी पनाह एक चट्टानी ओट थी, मगर वहाँ तक पहुँचने का इकलौता रास्ता एक तंग, बर्फ़ से ढकी पहाड़ी कगार से होकर जाता था, जिसके एक तरफ़ सीधी खाई थी।

दानिश ने आर्यन को अपनी पीठ पर उठाया और आगे बढ़ा। बर्फ़ीली हवा में क़दम रखना मुश्किल हो रहा था। तभी उसका दायाँ पैर बर्फ़ के नीचे छुपी एक ढलान पर फिसला। एक पल के लिए एसा लगा जैसे वो और आर्यन दोनों खाई में जाने वाले हैं।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे