होम / एक किस्त, एक दास्तान / रकीबनामा: दो दुश्मनों की दास्तान
एक किस्त, एक दास्तान

रकीबनामा: दो दुश्मनों की दास्तान

एक तूफ़ानी रात में दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी बर्फ़ में फंस जाते हैं, और सामने आता है तीन साल पुराना एक ऐसा सच जिसने दोनों की ज़िंदगी बदल दी।

अलीज़ा और दानिश बर्फ़ीले तूफ़ान में पीठ से पीठ सटाए खड़े, तूफ़ान में दो अजनबी कहानी

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

जब हेलिकॉप्टर की खिड़की से नीचे कसोल की वादी नज़र आई, दानिश ने अलीज़ा की तरफ़ देखा। कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दिया, वही मुस्कुराहट जो अलीज़ा के अब्बू की तस्वीर में हमेशा नज़र आती थी। अलीज़ा ने भी पहली बार, बिना किसी हिचक के, उसे मुस्कुराकर जवाब दिया।

जब तीनों को सुरक्षित नीचे लाया गया, तो कसोल के बाज़ार में एक अजीब सी ख़बर फैल गई। “पहाड़ी सफ़र” और “रकीब ट्रेल्स” के मालिक, जो कभी एक दूसरे की शक्ल तक नहीं देखते थे, अब कंधे से कंधा मिलाकर बेस कैंप से बाहर निकल रहे थे।

अगले हफ़्ते अलीज़ा ने ख़ुद दानिश की एजेंसी का दरवाज़ा खटखटाया। “एक आइडिया है,” उसने कहा, “क्यों न दोनों एजेंसियाँ मिलकर काम करें? तुम्हारा तजुर्बा, मेरी विरासत, तुम्हारी क्या राय है ?” दानिश ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दिया, हामी की तरह।

विरासत

यह क़िस्सा सिर्फ़ पहाड़ों का नहीं है, न सिर्फ़ बर्फ़ और तूफ़ान का। यह उस सच का है जो सालों तक ख़ामोशी की चादर में लिपटा रहता है, और सामने आने के लिए बस सही वक़्त और सही मुसीबत का इंतज़ार करता है। कुछ ऐसा ही सच एक डायरी के पन्नों में भी दबा हुआ था, जब विरासत में इनाया को अपनी दादी की गुज़री ज़िंदगी का एक भूला हुआ राज़ मिला था, ठीक वैसे ही जैसे अलीज़ा को एक तूफ़ानी रात में अपने अब्बू की मौत का असली सच मिला।

आज “पहाड़ी सफ़र और रकीब ट्रेल्स” एक साथ काम करती हैं, और हर नए ट्रेकर को अलीज़ा और दानिश दोनों मिलकर सिखाते हैं, “पहाड़ ख़ामोश रहते हैं, मगर झूठ कभी छुपाते नहीं।” फ़र्क़ बस इतना है कि अब यह लाइन कहते वक़्त दोनों की आँखों में नफ़रत नहीं, एक दूसरे के लिए एक ख़ामोश एहतराम होता है।

और तुम, जो यह कहानी पढ़ रहे हो, इतना याद रखना, हर नफ़रत की जड़ में एक कहानी होती है, और हर कहानी में एक ऐसा सच छुपा होता है जो शायद अभी तक कहा नहीं गया। किसी को मुजरिम बनाने से पहले एक बार उसकी ख़ामोशी को भी सुन लेना, क्योंकि कभी कभी सबसे बड़ी मोहब्बत उसी ख़ामोशी में छुपी होती है जिसे तुमने अब तक नफ़रत समझा था।

इन्हें भी पढ़िए

आपके ज़ेहन के सवाल

क्या यह कहानी किसी सच्ची घटना पर आधारित है?
नहीं, यह एक काल्पनिक कहानी है, “एक किस्त, एक दास्तान” सिरीज़ का हिस्सा। किरदार, एजेंसियाँ और घटनाएँ सिर्फ़ कहानी के लिए गढ़ी गई हैं।

कहानी किस जगह पर सेट है?
कहानी हिमाचल प्रदेश के कसोल इलाक़े की ट्रेकिंग वादियों में सेट है, जहाँ बर्फ़ीले तूफ़ान अचानक मौसम बदल सकते हैं।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे