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जगजीत सिंह: जिसने ग़ज़ल को महफ़िलों की क़ैद से आज़ाद कर हर आम दिल तक पहुँचा दिया

बिना टिकट की ट्रेन, पिता की नाराज़गी, बेटे का ग़म और एक अधूरी महफ़िल। जगजीत सिंह की वह दास्तान पढ़िए, जिसने ग़ज़ल को हर दिल तक पहुँचाया।

यौम-ए-वफ़ात पर जगजीत सिंह, हारमोनियम के साथ और पीछे ख़ाली मंच

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

फिर घर में बेटे विवेक की किलकारी गूँजी। जगजीत ने एक इंटरव्यू में कहा था, “उस वक़्त हमारे पास ज़्यादा कुछ नहीं था, लेकिन मुझे लग रहा था कि मैं दुनिया का सबसे अमीर इंसान हूँ।”

तंगहाली में मिली ख़ुशियाँ अक्सर दौलत से कहीं देर तक साथ निभाती हैं।

सादे अल्फ़ाज़, सादी धुनें और ग़ज़ल का ख़ामोश इंक़लाब

वह एल्बम, जिसने भारतीय ग़ज़ल की तारीख़ को “पहले” और “बाद” में बाँट दिया।

उस दौर में ग़ज़ल की दुनिया पर सरहद पार के उस्तादों का दबदबा था, और जगजीत-चित्रा की जोड़ी को सुनने वाले गिने-चुने थे। फिर आया 1977 और आई उनकी पहली एल.पी. The Unforgettable (द अनफ़ॉरगेटेबल)।

दस ट्रैक, कुछ में दोनों की जुगलबंदी, बाक़ी में बारी-बारी से जगजीत और चित्रा की आवाज़। आधुनिक अरेंजमेंट, पश्चिमी साज़ और सबसे बढ़कर सादगी। ब्रिटेन के अख़बार द इंडिपेंडेंट ने इसे हिंदुस्तानी ग़ज़ल के इतिहास का वह मोड़ कहा, जिसके बाद सब कुछ बदल गया। जगजीत ने ख़ुद बताया था, “मैं इस विधा को आज के मिज़ाज के क़रीब लाना चाहता था। इसलिए मैंने सादी नज़्में चुनीं, उन्हें सादी धुनों में ढाला, और उन्हें और जानदार बनाने के लिए पश्चिमी साज़ जोड़े।”

नतीजा? हिंदुस्तान की पहली कामयाब पति-पत्नी गायन जोड़ी, और इसी कामयाबी से बंबई में उनका अपना छोटा-सा फ़्लैट भी ख़रीदा जा सका।

फिर तो सिलसिला चल निकला। 1979 में लंदन के वेम्बली का लाइव कॉन्सर्ट एल्बम। 1982 में The Latest (द लेटेस्ट), जिसमें सुदर्शन फ़ाकिर की नज़्म “वो काग़ज़ की कश्ती” ने बचपन की बारिश को हर सुनने वाले की आँखों में उतार दिया। यह इस जोड़ी की पहली ऐसी एल्बम थी जो सिर्फ़ एक शायर के कलाम पर थी। और 1987 में Beyond Time (बियॉन्ड टाइम) हिंदुस्तान की पहली डिजिटल रिकॉर्ड की गई एल्बम बनी।

जब ग़ज़ल ने फ़िल्मों की दहलीज़ पार की

जिस ग़ज़ल गायक के लिए फ़िल्मों ने शुरू में दरवाज़े बंद रखे, वही एक दिन फ़िल्मी गीतों की सबसे दिलकश आवाज़ बन गया।

1981 की फ़िल्म प्रेम गीत में उन्होंने सारी धुनें बनाईं, और इंदीवर के लिखे “होंठों से छू लो तुम” ने मोहब्बत का नया पैमाना गढ़ दिया। फिर आई 1982 की अर्थ। महेश भट्ट की इस फ़िल्म में कैफ़ी आज़मी के अल्फ़ाज़ को जगजीत की आवाज़ मिली और “झुकी झुकी सी नज़र” और “तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो” जैसे गीत हर टूटे हुए दिल की डायरी बन गए। अर्थ और साथ साथ के गीतों का मिला-जुला एल्बम, कहा जाता है, HMV का अब तक का सबसे ज़्यादा बिकने वाला कॉम्बिनेशन एल्बम बना।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे