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जगजीत सिंह: जिसने ग़ज़ल को महफ़िलों की क़ैद से आज़ाद कर हर आम दिल तक पहुँचा दिया

बिना टिकट की ट्रेन, पिता की नाराज़गी, बेटे का ग़म और एक अधूरी महफ़िल। जगजीत सिंह की वह दास्तान पढ़िए, जिसने ग़ज़ल को हर दिल तक पहुँचाया।

यौम-ए-वफ़ात पर जगजीत सिंह, हारमोनियम के साथ और पीछे ख़ाली मंच

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

1988 में गुलज़ार का टीवी सीरियल आया, जिसमें जगजीत की आवाज़ और धुनों में उतरी मिर्ज़ा ग़ालिब की रूह। जिस शायर की पेचीदा ज़ुबान से लोग घबराते थे, वह जगजीत की सादा गायकी में हर घर की बैठक में आ बैठा। फिर 1998 में दुश्मन का “चिट्ठी न कोई संदेश” आया और परदेस में बैठे लाखों दिल एक साथ भीग गए।

वह साल जब सुर चुप हो गए

एक हादसा, जिसने ग़ज़ल की सबसे मशहूर जोड़ी को हमेशा के लिए अलग राहों पर ला खड़ा किया।

1990। जगजीत और चित्रा के बेटे विवेक एक सड़क हादसे में दुनिया छोड़ गए। उम्र सिर्फ़ 20 साल। दोनों ने एक पूरे साल तक गाना छोड़ दिया। साल भर बाद जगजीत धीरे-धीरे संगीत की तरफ़ लौटे, लेकिन चित्रा ने ऐलान कर दिया कि अब वह न गाएँगी, न रिकॉर्ड करेंगी। जो जोड़ी मंच पर साथ चमकती थी, वह अब सिर्फ़ ज़िंदगी में साथ रह गई।

द गार्डियन ने लिखा कि जगजीत गहरे अवसाद से गुज़रे और उनका दर्द उनकी लाइव प्रस्तुतियों में साफ़ झलकता था। उन्होंने अपने ग़म को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में उँडेला, जिनमें लता मंगेशकर के साथ आया “सजदा” भी शामिल है। 2009 में चित्रा की बेटी मोनिका की मौत ने एक और ज़ख़्म दे दिया।

ग़म को सुर देने वाला भी जब ख़ुद अपने ग़म के सामने बेआवाज़ होता है, तब सुनने वाले की आँखें ही उसकी आख़िरी महफ़िल बनती हैं।

सत्तर बरस, सत्तर महफ़िलें और एक अधूरा वादा

सत्तर की उम्र में जगजीत ने जश्न का जो तरीक़ा चुना, वह उनका आख़िरी अधूरा सपना बन गया।

10 मई 2007 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में 1857 की क्रांति की 150वीं सालगिरह पर जगजीत ने बहादुर शाह ज़फ़र की मशहूर ग़ज़ल “लगता नहीं है दिल मेरा” पेश की। 2003 में उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा जा चुका था।

फिर आया 2011, और वह 70 के हुए। जश्न का उन्होंने अनोखा तरीक़ा चुना: दुनिया भर में 70 कॉन्सर्ट। ब्रिटेन, सिंगापुर, मॉरीशस, कई जगह गाया। बीमार पड़ने से एक हफ़्ते पहले द पायनियर को दिए आख़िरी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि आप जितने सरल होंगे, आपको सुनने वाले उतने ही ज़्यादा मिलेंगे।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे