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एक किस्त, एक दास्तान

रिश्ता.. एक एहसास!

अंकित और नूपुर की कहानी, जहाँ कॉलेज की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदलती है, फिर सात साल की दूरी के बाद दोनों दोबारा मिलते हैं।

अंकित और नूपुर की प्रेम कहानी और सात साल बाद उनकी मुलाकात

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

ये सुनकर उसकी मां ने कहा – लेकिन बेटा तेरे पापा को बहुत ज्यादा चोट लगी है और खून भी बहुत बह चुका है। पता नहीं क्या होगा मुझे बहुत डर लग रहा है।

अपनी मां को इतना परेशान देखकर अंकित ने कहा – मम्मी,आप भगवान पर भरोसा रखो, पापा को कुछ नहीं होगा, बस थोड़ा टाइम लगेगा ठीक होने में।

वो दोनों आपस में बातें कर ही रहे थे कि तभी डॉक्टर ने आकर उनसे पूछा – आप दोनों क्या पेशेंट के साथ हैं?

अंकित ने जल्दी से कहा – जी हां वो मेरे पापा हैं और ये मेरी मम्मी हैं।

डॉक्टर ने अंकित की मां रमा पर एक नजर डालते हुए कहा – अच्छा अच्छा! देखिए आपके पापा का काफी ज्यादा खून बह गया है, जिसकी वजह से उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है, लेकिन वो खतरे से बाहर हैं। अगले 48 घंटों में वो रिकवर होने लगेंगे, लेकिन तब तक आप उनके लिए दुआ करें।

डॉक्टर की बात सुनकर अंकित ने कहा – थैंक यू सो मच डॉक्टर, हम तो कब से उनके लिए दुआ कर रहे हैं।

फिर देखते ही देखते एक हफ्ता यूं ही निकल गया और अंकित को इस दौरान किसी का भी होश नहीं था। उसकी जिंदगी बस हॉस्पिटल तक ही रह गई थी और वो बस ये चाहता था कि उसके पापा जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। ऐसे में कई बार उसे नूपुर का ख्याल भी आया लेकिन सिचुएशन ऐसी थी कि वो उसे चाहते हुए भी फोन नहीं कर पाया।

उधर नूपुर के पापा का कोलकाता में ट्रांसफर हो गया था। उसके पास जो मोबाइल था वो भी ट्रेन में कहीं छूट गया था जिसकी वजह से अंकित का फोन नंबर भी उसके पास नहीं था। वो बहुत परेशान थी कि वो कैसे अंकित से कॉन्टैक्ट करे। बस यूं ही दिन गुजर रहे थे उसने फिर अपनी पढ़ाई में अपना दिल लगा लिया। वहीं दूसरी ओर अंकित का बुरा हाल था। वो नूपुर से बहुत नाराज था कि वो बिना बताए न जाने कहां गायब हो गई।

कई बार उसने उसके मोबाइल पर फोन करने की कोशिश भी की, लेकिन उसका नंबर हमेशा बंद जाता। इन सब से वो बहुत टूट गया था और फिर पढ़ने के लिए इंडिया से बाहर चला गया। उसने जब अपना एमबीए पूरा कर लिया तो फिर वहीं नौकरी करने लगा, क्योंकि उसका इंडिया वापस आने का कोई इरादा नहीं था।

रिश्ता.. एक एहसास! हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन..

बस ऐसे ही दिन गुजरते जा रहे थे कि तभी एक दिन अंकित की मां का फोन आया और उसने उसे बताया – अंकित बेटा, आज राहुल घर आया था, अगले महीने की 20 तारीख को उसकी शादी है, वो कह रहा था कि तुम्हें शादी में जरूर आना है वरना वो नाराज हो जाएगा। अंकित ने पहले तो शादी में आने से मना कर दिया, लेकिन जब उसकी मां ने उस पर जोर डाला तो वो राहुल की शादी में आने के लिए तैयार हो गया।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे