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तलाश: एक क़दीम सक़ाफ़त में खोया हुआ माज़ी!

एक रहस्यमयी सफर, जहाँ एक नौजवान को हिन्दुस्तान के दूर-दराज़ कबाइली इलाके में एक पुरानी सक़ाफ़त और अपने माज़ी से जुड़ा अनोखा राज़ मिलता है।

तलाश: एक क़दीम सक़ाफ़त में खोया हुआ माज़ी | Khoobsurat Andaaz

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

पर पता नहीं इतनी कमजोरी होने के बाद भी मैं खड़ा हुआ और साथ चलने की जिद की। पहले तो राज नहीं माना, पर फिर कुछ सोच कर उसने हामी भरी। कुछ घंटों के बाद हमारा ग्रुप फिर झरने के पास पहुँचा। सब इधर उधर देख रहे थे तभी राज ने मुझे पूछा की बताओ, यहाँ क्या हैं।

एकाएक मुझे पता नहीं क्या हुआ। मैंने कहा जो कुछ हैं इस झरने के पीछे है। झरने के पानी के पीछे गुफा हैं जो आगे एक मैदान में निकलती है। राज बोला “पर वहाँ जाएंगे कैसे!”

मैंने मुसकुरा के कहा “ मुझे रास्ता पता हैं। ऐसा कहकर मैंने झरने के पास की चट्टानें पार की और एक चट्टान को खोदने को कहा। कुछ देर बाद जब चट्टान टूटी तो सामने गुफा का रास्ता था। सभी मेरे पीछे -पीछे अंदर आ गए। टॉर्च की रौशनी से गुफा रोशन हो गई। गुफा की दीवारों पर तरह-तरह की पुरानी तस्वीरों बनी हुई थी। यहाँ वहाँ खुदाई से कुछ पुराने बर्तन और पत्थर हो चुके हथियार मिले।

राज ने मेरे पास आके पूछा “अमन कुछ और हो तो बताओ।”

मैं कुछ न बोला और गुफा के बाहर आने लगा। गुफा में एक तरफ मिट्टी उभरी थी। मैं रुक गया। दल ने सावधानी से मिट्टी को हटाया। उन्हें एक लाश मिली। पूरी तरह सुकड़ी हुई ,पर मांस से भरी हुई। लेकिन उसमें बदबू नहीं थी।

मैंने कहा राज “यह एक नगमा निगार था।”

राज ने पूछा “ये कितने वर्ष पुरानी बात हैं?”

मैंने कहा “’लगभग 5500 साल पुरानी। राज ने फिर पूछा “तुम और कच जानते हो?”

मैंने कहा राज इन चट्टानों के पीछे एक सदी सो रही है, खतम हो चुकी सक़ाफ़त दफन हैं यहाँ। गुफा के आगे जो मैदान हैं वहाँ तुमको बहुत कुछ मिलेगा।

सब लोग हैरान थे, तब विकेश बोला “अमन भी आप यह सब कैसे जानते हैं, और यह लाश किसकी है।”

मेरे मुंह से अचानक निकला “यह लाश मेरी ही हैं।”

सब हैरत से मुझे देख रहे थे। मैं गुफा से निकलता हुआ मैदान की तरफ चल दिया। ठंडक बढ़ रही थी। रात होने वाली थी। हर तरफ खामोशी थी। आज वो ढोल नगाड़ों की आवाज़ नहीं या रही थी। दिल अब सुकून से था, और तबीयत में बेज़ारी खतम हो चुकी थी। एक भारीपन स था मुझपे, पर अब सब कुछ ठीक था, शायद मेरी तलाश पूरी हो चुकी थी।