तलाश: एक क़दीम सक़ाफ़त में खोया हुआ माज़ी!
एक रहस्यमयी सफर, जहाँ एक नौजवान को हिन्दुस्तान के दूर-दराज़ कबाइली इलाके में एक पुरानी सक़ाफ़त और अपने माज़ी से जुड़ा अनोखा राज़ मिलता है।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
वहाँ बैठे-बैठे दिल में शायरी के तसूरात आने लगे और मैंने बैग से डायरी निकली और लिखने लगा। पता नहीं मैं कहाँ खो गया था, और मेरा पेन पता नहीं डायरी पर क्या लिखने लगा। कुछ देर इसी मदहोशी के आलम में वहाँ बैठा रहा।
शाम ढल रही थी। हम सब वापिस खेमे की और बढ़ चले। वह पहुंचते रात हो गयी। खाना खा कर हमारी मीटिंग हुई। फिर हम अपने-अपने खेमे में सोने चले गए। आज वो धुन की आवाज बहुत नजदीक से आती लग रहे थी। इसे महेज़ एक भरम मानकर मैं सो गया।
अगली सुबह जल्दी हम लोग जल्दी नीचे पहुंच गए। हम लोग ग्रुप में बट गए। मेरे ग्रुप का लीडर था विकेश। मैंने कहाँ “ विकेश तुमको लगता है क्या यहाँ कभी कोई रहता होगा, यहाँ तो कुछ भी नहीं दिख रहा।”
विकेश हंसने लगा और बोला, अमन भी, कुछ कह नहीं सकते, पर जो कुछ हमको यहाँ की पिछली खोजो से पता चला है, उसके बिना पर तो अभी नहीं ,पर पहले यहाँ अनेक सुविधाएं होंगी, और कभी यहाँ कोई पुरानी कबाइली तहज़ीब जरूर होगी। बस थोड़ा वक़्त लगेगा पता लगने में।
मेरा दिल अब वहाँ नहीं लग रहा था। मुझे बोरियत होने लगी थी। उस रात खाना खाकर मेने राज से पूछा और कितने दिन रुकना है राज ने कहा “ यही कोई दस-बीस दिन। क्यूँ क्या हुआ तेरा मन नहीं लग रहा क्या। मैंने तो पहले ही कहाँ था, की तू बोर हो जाएगा। बता वापिस जाने का दिल हो रहा है?”
मैंने वापस जाने की हामी भर दी। राज बोला दो दिन बाद हम लोग शहर जाने वाले है, तभी तुमको स्टेशन चोर देंगे। तब तक तो तुझे बोर होना ही पड़ेगा । यह कह कर राज मेरे खेमे से जाने लगा, तभी उसकी नजर मेरी डायरी पर पड़ी। वह बोला “कुछ लिखा है यहाँ के बारे मैं?”
मैं बोला कुछ नहीं लिखा यार, बस शुरू किया था, पर कुछ लिखने लायक मिला ही नहीं।
राज फिर भी डायरी को देखने लगा और पन्ने पलटने लगा। एक पन्ने पर रुक गया उसने कहा ये तूने क्या लिखा हैं!
मैंने पूछा क्या तो राज ने हैरत से मुझे देखते हुवे बताया की मैंने यहाँ की जबान मैं कुछ लिखा है। इस ज़बान से कुछ मिलते जुलते पुराने दस्तावेज़ पिछली खुदाई मैं मिले थे। यह जबान कभी इस कबाइली इलाके की जबान रही होगी ऐसा मानना है।
राज की बात सुन मुझे पहले यकीन नहीं हुआ। पर फिर उसने मुझे कुछ पुराने दस्तावेज़ और फोटोग्राफ दिखाए। मैंने देखा की उन पुराने फोटोग्राफ और कुछ दस्तावेज़ों मैं कुछ वैसे ही लिखा था जो मेरी डायरी के कागजों पर था। मुझे कुछ समझ नहीं आया। मुझे यकीन नहीं आया तो राज ने उस ज़बान को थोड़ा बहुत समझने वाला तर्जुमा किया और बताया की यह शायद एक कविता होगी।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे