तेरी उल्फत में | अफवाहें, मोहब्बत और दर्द का अनकहा पहलू | क़िस्त 06
“नहीं अलविना यह क्या कर रही हो। मैं खुद ले लूंगा। मैं इतना महंगा लैपटॉप नहीं ले सकता” न्यूटन ने इंकार करते हुए कहा। “देखो न्यूटन, अगर तुम यह नहीं लोगे तो मैं यही समझूंगी कि तुम अभी भी मुझसे नराज हो।” अलविना ने ज़बरदस्ती करते हुए कहा। “अरे मैं नहीं हूं नाराज़। बट यह […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
“नहीं अलविना यह क्या कर रही हो। मैं खुद ले लूंगा। मैं इतना महंगा लैपटॉप नहीं ले सकता” न्यूटन ने इंकार करते हुए कहा।
“देखो न्यूटन, अगर तुम यह नहीं लोगे तो मैं यही समझूंगी कि तुम अभी भी मुझसे नराज हो।” अलविना ने ज़बरदस्ती करते हुए कहा।
“अरे मैं नहीं हूं नाराज़। बट यह काफ़ी कॉस्टली है। प्लीज़ अलविना समझो बात को।” न्यूटन ने समझाते हुए कहा।
“ओके, ठीक है। जब तुम न्यू ले लेना तब मुझे लौटा देना। अभी तो रख लो। जस्ट फॉर मी, मेरी खतिर! प्लीज़!” अलविना ने फिर ज़ोर दिया।
“अच्छा ठीक है, अलविना पर एक शर्त है, मैं इसका पूरा पेमेंट करूंगा। और तुम मना नहीं करोगी।” न्यूटन लैपटॉप लेते हुए बोला।
अलविना ख़ुशी – ख़ुशी बोली “मंज़ूर है। पर अभी नहीं जब तुम ठीक होके, जॉब करने लगोगे तब।” न्यूटन ने सिर्फ सहमती से सर हिलाया। कुछ देर बाद अलविना वापस चली गई और न्यूटन भी सो गया।
"जिन रास्तों पर चलाईं अफवाहों की चालें,
वहीं मोहब्बत ने लिख दी अपनी मिसालें।"
न्यूटन की दर्द भरी कहानी.. एक दर्द भरा पहलू
न्यूटन जल्दी ही रिकवर हो के वापस हॉस्टल आ गया। मेहनती तो वह था ही। बस जल्दी ही उसने अपना प्रोजेक्ट भी सबमिट कर दिया। सभी लोग अब खुश थे। आखिर न्यूटन फिर से पहले जैसा हसमुख जो हो गया था। जिंदगी फिर से खुशनुमा हो गई थी।
उस दिन न्यूटन लाइब्रेरी में बैठा था कि अलविना उसके पास आई। “कैसे हो न्यूटन?”
“बस ठीक हूं, फाइनल सेमेस्टर के पेपर्स की तैयारी चल रही है।” न्यूटन ने जवाब दिया।
“कितना पढ़ते हो तुम, जब देखो किताबो से चिपके रहते हो! थकते नहीं हो तुम।” अलविना ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“थकता हूं, पर कोई चारा भी नहीं है। अच्छे ग्रेड्स लाने हैं। अगर अच्छे ग्रेड्स नहीं आएंगे तो करियर पे असर पड़ेगा। और वैसे भी मेरे पास करियर बनाने के लिए यही एक मौका है। अगर अच्छे नंबर नहीं आए तो, वही थ्री इडियट्स वाली बात हो जाएगी, बैंक क्रेडिट कार्ड नहीं देगा, कोई बाप अपनी बेटी नहीं देगा। और मैं सारी जिंदगी अकेला नहीं रहना चाहता।” न्यूटन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
“ओह तो आप सेटल होना चाहते हैं, मतलब इतनी मेहनत किसी लड़की के लिए हो रही है। कौन है। जिसके बाप को इंप्रेस करने के लिए चिपके हो बुक्स में।” अलविना ने न्यूटन की टांग खींची।
“आप भी कहां की बात करने लगी अलविना जी! मेरे जैसे लड़के की गर्लफ्रेंड। सोच कर देखिये। मेरे जैसे लड़के की गर्लफ्रेंड्स नहीं होती। हमारे जैसे लड़के सिर्फ़ इग्नोर किए जाते हैं। मुझे तो लगता ही नहीं कभी मेरी जिंदगी में कोई लड़की आएगी या मेरी शादी भी होगी।” न्यूटन ने मुस्कुराते हुए कहा।
“क्यूं, ऐसा क्या सोचते हो, क्या प्रॉब्लम है तुम में। अच्छे इंसान हो। दिखने में भी क्यूट हो।” अलविना ने कहा।
“बस अलविना जी, तजुर्बा है।” न्यूटन ने ज़बरदस्ती मुस्कुरते हुए कहा।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे