तेरी उल्फत में | अफवाहें, मोहब्बत और दर्द का अनकहा पहलू | क़िस्त 06
“तजुर्बा, बड़ा तजुर्बा है तुमको! अगर तुम किसी को पसंद करते हो तो उसे जा के बोलो तो। उसे ख्वाब थोड़े ही आएगा। मुझे तो नहीं लगता कि कोई लड़की तुमको इंकार करेगी। जब तक अपने दिल की बात नहीं कहोगे तब तक कैसे बात बनेगी।” अलविना ने अपनी बात रखी। "वो जो सबसे करीब […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
“तजुर्बा, बड़ा तजुर्बा है तुमको! अगर तुम किसी को पसंद करते हो तो उसे जा के बोलो तो। उसे ख्वाब थोड़े ही आएगा। मुझे तो नहीं लगता कि कोई लड़की तुमको इंकार करेगी। जब तक अपने दिल की बात नहीं कहोगे तब तक कैसे बात बनेगी।” अलविना ने अपनी बात रखी।
"वो जो सबसे करीब था, वही सबसे दूर हो गया,
सच तो यह है, इश्क़ हर दर्द से भरपूर हो गया।"
उसकी दलील सुन के न्यूटन ने अपनी किताब बंद की। अपनी आंखें बंद की। गहरी सांस ली, फिर बोला “उसका नाम फ़िज़ा था … BBA फ़ाइनल ईयर में मेरे साथ पढ़ती थी। कॉलेज मिड टर्म में ज्वॉइन किया था। तो पढ़ाई में मुश्किल हो रही थी। इसी चक्कर में उसकी और मेरी जान पहचान हो गई। मैं उसकी हेल्प करने लगा। हमारी दोस्ती बढ़ने लगी। वह पूरे दिन मेरे साथ ही रहती थी। कैंटीन हो या क्लास। शॉपिंग हो या मूवी, हर जगह मेरे साथ। यहां तक की कपड़े भी मुझसे सेलेक्ट करवाती थी। हमेशा बस एक बात कहती थी, कि मेरे बगैर अपने को अधूरा और अकेला समझती है।” इतना कह के न्यूटन चुप हो गया।
“फिर क्या हुआ?” अलविना ने पूछा। “उस दिन मेरी सालगिरह थी। मैं फ़िज़ा को बर्थडे ट्रीट देने के लिहाज़ से एक रेस्टोरेंट ले गया था। मैं फ़िज़ा को पसंद करने लगा था। और चाहता था कि उसे उसी दिन प्रपोज करूं। तो जब डिनर के बाद उसने मुझसे पूछा कि गिफ्ट क्या लोगे तो मैंने कहा कि थोड़ी देर बाद बताउंगा। रेस्टोरेंट के पास एक पार्क था। हम अक्सर वहां जाते थे।
वहां पहुंच के मैंने उसे अपने दिल की बात कह दी। मेरी बात सुनकर उसके चेहरे का रंग बदल गया। फिर बस मुझे इतना याद है कि मेरे गाल पर दो तमाचे पड़े थे। उसने मुझसे कहा कि, अपनी शकल देख के बात करो। तुम हो ही क्या। मैं जरा देर तुमसे अच्छे से बात करने क्या लगी तुम मुझसे यह एक्सपेक्ट करने लगे कि मैं तुमसे प्यार करती हूं। अरे तुम्हारे जैसे लड़कों को तो मैं भाव भी नहीं देती। वह तो तुम मेरी स्टडीज में हेल्प कर रहे थे तो मैं भी तुमसे अच्छे से पेश आ रही थी। और तुम्हारी इतनी हिम्मत बढ़ गई कि तुम मुझसे मोहब्बत के ख़्वाब देखने लगे।
तुम दो कौड़ी के मिडिल क्लास लोगों को मुंह लगाना ही नहीं चाहिए। यह कहकर वह वहां से चली गई। मैं वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा। ना जाने कब तक वहीं खड़ा रहा। आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे। मैं टूट गया था उस दिन। पहली बार किसी को सच्चे दिल से चाहा था।” इतना कह के न्यूटन चुप हो गया। उसकी आंखें नम थीं।
अलविना ने कहा “सॉरी न्यूटन, मैंने बिना वजह तुम्हारी पुरानी यादें ताजा कर तुमको हर्ट कर दिया। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। बस मैं मजाक में…. प्लीज मुझे माफ करदो।” अलविना जानती थी कि अंजाने में उसने न्यूटन की जिंदगी का एक दर्द भरा पहलू छेड़ दिया था। उसे बहुत अफसोस हो रहा था।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे