तेरी उल्फत में | कशिश और अरसलान के टकराव की पहली झलक | क़िस्त 07
अरसलान को गुस्सा तो आया पर फिर भी वह कॉफी लेने के लिए जाने लगा। “और हां, कॉफी अच्छी होनी चाहिए अरसलान।” कशिश ने कातिलाना मुस्कुराहत के साथ अरसालान को टोका। थोड़ी देर बाद अरसालान एक कप कॉफी के साथ लौटता है। कशिश ने फिर तंजिया लहजे में कहा “एक कप कॉफी लाने में इतना […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
अरसलान को गुस्सा तो आया पर फिर भी वह कॉफी लेने के लिए जाने लगा। “और हां, कॉफी अच्छी होनी चाहिए अरसलान।” कशिश ने कातिलाना मुस्कुराहत के साथ अरसालान को टोका।
थोड़ी देर बाद अरसालान एक कप कॉफी के साथ लौटता है।
कशिश ने फिर तंजिया लहजे में कहा “एक कप कॉफी लाने में इतना वक्त! तुम तो यहां चपरासी के काम के लायक भी नहीं हो। पता नहीं तुमको किस लिए यहां रखा गया है। खैर कॉफी अच्छी है।”
कशिश कॉफी पीते हुए अपने सिस्टम पे बिजी हो गई। अरसलान कुछ देर खड़ा रहा, फिर बोला “जी क्या अब मैं जा सकता हूं।”
कशिश ने उसे बिना देखे ही कहा “यहाँ खड़े – खड़े कोई तीर अगर ना मार रहे हो तो बेशक जाओ। वैसे भी अभी मुझे केबिन को सही करना है। सब फैला हुआ है। निकलो और मिस्टर मोहित को अंदर भेजो जरा जल्दी।”
कशिश ने मिस्टर मोहित को ऑर्डर दिया “मिस्टर मोहित मुझे जरा यह केबिन डेकोरेट करना है। किसी ढंग के डिजाइनर को बुलाएं।”
मिस्टर मोहित “जी मैम, मैं अभी कुछ अच्छे डिजाइनर से राब्ता करता हूं।”
कशिश ने केबिन में रखी फाइलों को देखते हुए कहा “हम्म, मुझे यहां का काम समझना है, इसलिए शुरू करने के लिए आप कुछ फाइलें भेजिए।”
“जी बेहतर है, मैं अभी कुछ फाइलें लाता हूं।” मिस्टर मोहित ने जवाब दिया और केबिन से बाहर चले गए।
अरसलान, अपनी सीट पे बैठा हुआ काम कर रहा था, उसका मूड सही नहीं था। सना उसके पास आके बोली, “यार यह कशिश तो किसी को इंसान ही नहीं समझती। पहले दिन ही मोहित सर को पियोन बना डाला है।”
“बेकार का घमंद है!” रोहित ने दोनो की बातों में दखल दी।
"मुझे आईना दिखाने की हिम्मत तो कर,
पर याद रहे, ये गुरूर मेरा नहीं, वक्त का असर है।"
“भाई, पैसा बोलता है। जब सब कुछ आसानी से मिलता है तब ज्यादातर ऐसा ही होता है।” राज भी शामिल हो गया।
तभी सिमरन वहां आई और बोली “तुम लोगों को आज कॉफी या चाय नहीं पीनी जो यहां बैठे हो। चलो कैफेटेरिया।” और फिर सब कैफेटेरिया की तरफ चल पड़े।
थोड़ी देर बाद जब सब वापस लौटे तो कशिश ने फिर अरसलान को बुलाया। अरसलान केबिन में दखिल हुआ और बोला “जी मैम”
कशिश ने फिर उसे देखे बगैर कहा “हम्म, अगर कैफेटेरिया की तफरी खत्म हो गई हो तो कुछ काम भी कर लो।”
अरसलान बोला “मैम, मैं ब्रेक पे गया था। हम सभी शाम को ब्रेक लेते हैं।”
कशिश बोली “ओह, सभी लेते हैं ब्रेक। पर वो काम करते हैं। टाइम पास नहीं करते तुम्हारी तरह।”
अरसलान फिर ज़ब्त कर गया।
“हम्म, अच्छा एक काम करो। मैं अब जा रही हूं, जरा ये फाइल उठाओ और मेरी कार में रखवाओ।” कशिश ने उठते हुए कहा।
अरसलान बहुत मुश्किल से अपने आपको संभाल रहा था। आज तक कभी किसी ने उसके साथ ऐसा बरताव नहीं किया था।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे