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तेरी उल्फत में | कशिश और अरसलान के टकराव की पहली झलक | क़िस्त 07

“हां तो अब तुम क्या करोगे? पता नहीं क्या इश्यू हो गया है तुमको अपने आपसे। अच्छे खासे इंसान हो। शक्ल सूरत से भी, किरदार से भी, एक मतलबी लड़की ने रिजेक्ट क्या किया, अब तुमको लग रहा है कि सब तुम्हारे साथ ऐसा ही करेंगे। “रोहित ने गुस्से से कहा। न्यूटन को गुस्सा आ […]

Kashish and Araslan Clash: The First Glimse

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

“हां तो अब तुम क्या करोगे? पता नहीं क्या इश्यू हो गया है तुमको अपने आपसे। अच्छे खासे इंसान हो। शक्ल सूरत से भी, किरदार से भी, एक मतलबी लड़की ने रिजेक्ट क्या किया, अब तुमको लग रहा है कि सब तुम्हारे साथ ऐसा ही करेंगे। “रोहित ने गुस्से से कहा।

न्यूटन को गुस्सा आ गया इस बात पे और वह उठकर चला गया। अरसलान और राज उसको रोकते रहे पर वह नहीं रुका।

"एक गुलाब से आई पहचान,
दिल का हाल लिख गया कोई अनजान।"
"मुझे देखता है वो छुप-छुपकर कहीं से,
पर मोहब्बत की ये खुशबू छुपाई नहीं जाती।"

राज और सिमरन की कश्मकश

तभी वहां सना और हिना भी पहुंची। वो न्यूटन को गुस्से से जाते हुए देख चुकी थीं। हिना बोली “आज क्या किया है तुम लोगों ने। न्यूटन को फिर परेशान किया है क्या।” उन दोनों को लगा था कि रोज़ वाली खिंचाई है जो अक्सर उन लोगों में होती रहती थी।

“नहीं यार, इश्यू दूसरा है। न्यूटन को एक लड़की पसंद करती है।” फिर अरसलान सारी बात बताता चला गया। सना बोली “और न्यूटन अभी तक फ़िज़ा वाली बात को भूला नहीं है। सच में कुछ समझ नहीं आता कि क्या किया जाए न्यूटन का। न्यूटन उस बात को दिल पे लगा के बैठा है। उसे लगता है कि वह किसी लड़की को डिजर्व ही नहीं करता। “कुछ चीजो को वक्त पर छोड़ देनी चाहिए। वक्त में बड़ी ताकत होती है। बड़ी से बड़ी चोट भर जाती है।” सिमरन ने आते हुए कहा।

देखो मुझे लगता है कि समस्या को न्यूटन को खुद हैंडल करने दो, वह समझदार है। मुझे पता है कि तुम सबको उसकी फ़िक्र है। पर मुझे लगता है कि न्यूटन के अंदर जो घुटन है उसे वह खुद ही मिटा सकता है। सिमरन ने अपनी राय रखी।

“शायद यही सही रहेगा। आप सही कह रही हैं।” अरसलान ने कहा। बाकी लोग भी सिमरन की राय पे मुतमयीन थे। “सिमरन मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। फ्री हो अभी।” राज ने सिमरन से पूछा।

“आप क्या बात करोगे मिस्टर राज शेखर वर्मा, बात तो मुझे तुमसे करनी है। एक महीने से तुमसे कह रही हूं कि डेट पे ले जाओ, डेट पे ले जाओ। टाल रहे हो, धोकेबाज़ कहीं के। अभी यह हाल है तो आगे क्या होगा। सिमरन ने गुस्से से कहा, तो सब हंसने लगे।

“हां यार राज यह गलत बात है, तू हमारे साथ घूमता रहता है। कभी मूवी कभी डिनर, पर सिमरन को क्यों नहीं ले जाता।” रोहित ने साफ झूठ बोला। अरसलान कहां पीछे रहने वाला था “हां सिमरन, आज सुबह ही मुझसे कह रहा था कि चलो आज शाम कोई न्यू मूवी देखते हैं।”

“हां-हां, बिल्कुल जाओ, मेरी क्या ज़रूरत है। मैं ही पागल हूं ना जो तुमसे दिल लगा बैठी।” सिमरन फिर गुस्से से बोली। राज हैरान परेशान होते हुए बोला “अबे कमीनों मैंने कब कहा, कब मैं तुम लोगों के साथ घूमने गया हूं पिछले एक महिने में। यहां सांस लेने का टाइम नहीं है और तुम लोग मुझको मरवाने पे तुले हुए हो।”

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे