तेरी उल्फत में | कशिश और अरसलान के टकराव की पहली झलक | क़िस्त 07
ऑफिस में सब अरसलान को फाइल्स उठाए कशिश के पीछे चलते हुए देख रहे थे। कोई कशिश के रवैये से खुश नहीं था। कार के पास पहुंच के कशिश बोली “मैं अपना मोबाइल ऊपर भूल गई हूं, जरा उसे ले के आना जल्दी से।” अरसलान फाइल्स कार में रखकर वापस चला गया फोन लेने के […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
ऑफिस में सब अरसलान को फाइल्स उठाए कशिश के पीछे चलते हुए देख रहे थे। कोई कशिश के रवैये से खुश नहीं था।
कार के पास पहुंच के कशिश बोली “मैं अपना मोबाइल ऊपर भूल गई हूं, जरा उसे ले के आना जल्दी से।”
अरसलान फाइल्स कार में रखकर वापस चला गया फोन लेने के लिए। कुछ देर बाद वह फोन के साथ लौटा।
कशिश कार में बैठे हुए बोली “हम्म… चलो तुमने कुछ तो काम किया आज। एक बात का ध्यान रखना अरसलान, अब इस ऑफिस में हमारी तरह से काम होगा। इसलिए काम की आदत डाल लो, खुद भी और अपने बाकी के चमचों को भी समझा दो। वरना ऑफिस से बाहर करने में मुझे वक्त नहीं लगेगा, तुम्हारे जैसे दो कौड़ी के इंसान को।”
फिर कशिश वहां से चली गई। अरसलान गुस्से में तो था, पर अपने जप्त को काबू में रखना उसे आता था।
"ख़ामोशी से जवाब देते हैं जो,
उनके सब्र की कीमत कोई क्या समझे।"
फकत आपकी अंजान मोहब्बत
अगले दिन ऑफिस में न्यूटन अपने वर्कस्टेशन पे बैठा काम में मसरूफ था। तभी एक प्योन उसके पास आ के बोला, “सर आपके लिए यह पैकेट आया है।”
न्यूटन ने पूछा “कौन दे गया है यह पैकेट?” “सर, एक लड़की आई थी। कहा कि आपकी जान है।” प्योन ने जवाब दिया।
यह कहकर वह वहां से चला गया। न्यूटन सोचने लगा कि उसे कौन यह पैकेट दे गया। उसके सारे दोस्त तो यही हैं। न्यूटन ने पैकेट खोला। एक खूबसूरत से बॉक्स में एक ताजा गुलाब रखा था। उसके साथ एक कार्ड था। न्यूटन ने कार्ड को लिफाफे से निकाला। बहुत ही खूबसूरत कार्ड था अंदर। कार्ड के अंदर खूबसूरती से कुछ लिखा हुआ था।
“साहिल,
आप मुझे नहीं जानते, पर मैं रोज आपको फॉलो करती हूं। असल में आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं। इसलिए रोज आपको कॉलेज से ऑफिस आते हुए फॉलो करती हूं। कॉलेज की लाइब्रेरी में भी जब आप किताबों में मसरूफ़ रहते हैं, तब मैं आपको देखने में मसरूफ़ रहती हूं। मुझे आपका हंसना, बात करना बहुत अच्छा लगता है। आज जो महरून शर्ट आपने पहनी है वह आप पर अच्छी लग रही है। पर आप काले रंग की शर्ट में ज़्यादा अच्छे लगते हैं।
जिस दिन मैंने आपको पहली बार देखा था, उसी वक्त मैंने अपनी सांसें रुकती हुई महसूस की। शायद मुझे आपसे मोहब्बत हो गई है। आप सोच रहे होंगे कि यह क्या बात हुई, या जान ना पहचान तू मेरा मेहमान वाली बात है। पर यक़ीन कीजिए मोहब्बत का कोई रूल नहीं होता, कब किससे हो जाए पता नहीं चलता। जल्द ही आपसे दोबारा राब्ता करूंगी।
खुदा हाफिज़! फ़क़त आपकी अंजान मोहब्बत
न्यूटन अजीब कश्मोकश में था। वह सोच रहा था कि यह कौन लड़की एकदम से उसे चाहने लगी। उसे रोज़ फॉलो करती है और ऊपर से उसे यह भी पता है कि वह आज क्या पहने हुए है। वह सोच ही रहा था कि तभी, कशिश ऑफिस में दाखिल हुई।
"एक अजनबी ख्वाब सा लगता है,
कहीं दूर से आया पैगाम सा लगता है।
इश्क़ की राहों में जो उलझा,
हर ख़ुशी अधूरी तमाम सा लगता है।"
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे