तेरी उल्फत में | कशिश और अरसलान के टकराव की पहली झलक | क़िस्त 07
“उनपे गुस्सा ना उतारो मुझसे बात करो। मुझे पक्का पता है कि ये सच ही बोले रहे हैं। वो तो खुद तुमको समझा रहे होंगे कि कभी मुझे भी कहीं बाहर ले जाओ। “सिमरन ने फिर कहा। “हां राज यह बिल्कुल सही बात नहीं है, हमको तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।” अब की बार सना […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
“उनपे गुस्सा ना उतारो मुझसे बात करो। मुझे पक्का पता है कि ये सच ही बोले रहे हैं। वो तो खुद तुमको समझा रहे होंगे कि कभी मुझे भी कहीं बाहर ले जाओ। “सिमरन ने फिर कहा। “हां राज यह बिल्कुल सही बात नहीं है, हमको तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।” अब की बार सना ने धावा बोला।
हिना भी अब राज को घूर रही थी। राज हैरान था, कि यह हो क्या रहा है। तभी रोहित हंसने लगा, उसके साथ सभी हंसने लगे। हंसते – हंसते बोला “बस यार और कंट्रोल नहीं होता, इसकी ऐसी हालत देखकर मुझसे नहीं रहा जाता। बस करो भाई। और खिंचाई ना करो।”
राज फिर हैरान था। “यह हो क्या रहा है, कोई मुझको बताएगा।” “कुछ खास नहीं, बस हम सब मिलकर तुम्हारी खिंचाई कर रहे थे।” सिमरन ने हंसते हुए कहा।
“तो ये सब तुम लोग जानबूझ के कर रहे थे।” राज ने थोड़ी नाराज़गी से कहा।” सबने सिर्फ मुस्कुराते हुए हामी भरी। “यह गलत किया आज तुम सब लोगों ने, ऐसा मजाक! यह ठीक नहीं है।” राज के चेहरे पे नाराजगी साफ दिख रही थी। सब चुप हो गए। सिमरन ने उसे समझाना चाहा, पर उसे मना करके वह वहां से चला गया। सब लोग एक दूसरे को देखते रह गए।

जलालुद्दीन रूमी: मोहब्बत और रूहानियत के शायर
फारसी साहित्य के महान लेखक जलालुद्दीन रूमी ने अपनी गजल और कविताओं से जो पहचान बनाई है, उसे मिटा पाना नामुमकिन है। यह महान मुस्लिम कवि, सूफी संत, इस्लामी विद्वान, धर्म विज्ञानी और न्यायवादी थे। वैसे तो इन्होंने हजारों कविताएं और गजलें लिखी हैं। लेकिन सबसे प्रसिद्ध काव्यात्मक कृति मसनवी है।
इस कृति में लगभग 50000 छंद हैं, जिसमें इन्होंने इंसानी जिंदगी को अच्छे से समझाया है। इनके द्वारा की गई रचनाओं से लाखों लोगों को जीने की नहीं राह मिली है। इन्होंने प्रेमियों के लिए भी कई गजल और कविताएं लिखी हैं। इसके अलावा यह एक समाजवादी इंसान भी थे। इन्होंने हमेशा समाज की भलाई के लिए कई काम भी किए हैं। इस पोस्ट के जरिए हम आपको जलालुद्दीन रूमी का जीवन परिचय (Jalal Al Din Rumi Biography) बताने वाले हैं।