कुमार विश्वास : पढ़ाई बीच में छोड़ी, प्रेमिका के प्रेम में बने कवि, जानिए इनकी फिल्मी कहानी
कॉलेज छोड़कर कवि सम्मेलन का बादशाह बने कुमार विश्वास, अब "रामायण" फ़िल्म के गीतों से भी चर्चा में हैं। पढ़िए सफ़र, फ़ीस और जीवन की पूरी कहानी।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
- साल मुबारक
- तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
- महफ़िल महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है
- बाँसुरी चली आओ
- हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें
- नेह के सन्दर्भ बौने हो गए
- होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
- मैं तो झोंका हूँ
- बात करनी है, बात कौन करे
- देवदास मत होना
- एक पगली लड़की के बिन
- रंग दुनिया ने दिखाया है
- हो काल गति से परे चिरंतन
- उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती
- तुम्हारा फ़ोन आया है
- प्रीतो!
- मैं तुम्हें ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है! एक नज़म जो रूह के जज़्बात को छु लेती है!
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है! कुमार विश्वास की एक नज़म जो रूह के जज़्बात को छु लेती है। इस का हर एक लफ्ज़, जज़्बात का सफर है। कुमार विश्वास की इस नज़म में, मोहब्बत के रंग है, जो इसके हर अलफ़ाज़ में बसा हुए हैं ।. यह कोई आम नज़म नहीं है, बल्कि एक ऐसी अनोखी दुनिया का सफर है जहाँ मोहब्बत के रंग ख़ूबसूरती से पेश किये हुवे हैं । हर लफ्ज़, हर अल्फ़ाज़, हर भाव, सब कुछ है इस नज़म में! यह एक सफर है, जिसमे मोहब्बत और दुनिया का मिलान का एक अनोखा अनुभव है।
कुमार विश्वास का राजनीतिक कैरियर
कुमार विश्वास प्रसिद्ध कवि होने के साथ-साथ राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। यह साल 2011 में जन लोकपाल को लेकर अन्ना हजारे के द्वारा शुरू किए गए आंदोलन में सदस्य बने थे। यही वह आंदोलन था, जब आम आदमी पार्टी की नींव रखी गई थी। यह आम आदमी पार्टी के मुख्य सदस्यों में से एक थे।
साल 2014 में इन्होंने लोकसभा चुनाव में टिकट लेकर चुनाव लड़ा था। इन्होंने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। लेकिन इन्हें हार का सामना करना पड़ा था। साल 2015 में यह फिर से दिल्ली विधानसभा के चुनाव में शामिल हुए थे। लेकिन यह कैंडिडेट नहीं बने थे। इन चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक तरफा जीत हासिल की थी, जिसमें इनका काफी बड़ा योगदान था।
इनके राजनीतिक कैरियर में इन पर कई प्रकार के आरोप भी लगे थे। दिल्ली के जंतर मंतर में जब कुमार विश्वास आंदोलन कर रहे थे, तो इन्होंने दिन रात अपना सहयोग देकर आंदोलन को कामयाब बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साल 2013 में दिल्ली चुनाव में भी यह नजर आए थे। अब कुमार विश्वास बेशक राजनीतिक दुनिया को छोड़ चुके हैं। लेकिन आज भी इनके द्वारा किए गए सहयोग को याद किया जाता है।
कुमार विश्वास की जाती दुनिया
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे