तेरी उल्फत में | इज़हार-ए-मोहब्बत | क़िस्त 05
सिमरन ने हंसते हुए कहा “कोई दो घंटे हो गए हैं, मैं तो पापाजी और हिना के साथ खाने का इंतज़ाम कर रही थी। तभी मैंने अपने स्वीटु जानू को थका हुआ, मुरझाया हुआ देखा, तो कसम से रहा ना गया। बस आ गई मैं तुम्हारे लिए! और तुम ऐसे घबरा रहे हो जैसे कोई […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
सिमरन ने हंसते हुए कहा “कोई दो घंटे हो गए हैं, मैं तो पापाजी और हिना के साथ खाने का इंतज़ाम कर रही थी। तभी मैंने अपने स्वीटु जानू को थका हुआ, मुरझाया हुआ देखा, तो कसम से रहा ना गया। बस आ गई मैं तुम्हारे लिए! और तुम ऐसे घबरा रहे हो जैसे कोई भूतनी देख ली हो!
तभी मेजर शेखर भी आ गए और बोले “सिमरन बेटा, क्या हुआ? इस नमूने ने कुछ कहा तो नहीं ना”
सिमरन बिल्कुल भोली बनकर बोली “देखिए ना पापाजी, मैं इतनी देर से जूस लिए खड़ी हूं, पर यह ले ही नहीं रहे।”
इसपर मेजर शेखर बोले “यह क्या हरकत है राज, बच्ची इतनी मेहनत से तेरे लिए जूस लायी है और तू नखरे कर रहा है?”
राज के कुछ समझ ही नहीं आ रहा था, सिमरन ने एक घंटे में मेजर शेखर को अपना पापा बना लिया था और वह अब उसके लिए राज की खिंचाई कर रहे थे। उसने झट से जूस का ग्लास लिया और एक सांस में पी डाला। सिमरन ने फिर टांग खींची “पापाजी, देखिए कैसे जानवरों की तरह पी रहे हैं। इनके कपड़ों पे भी गिर गया जूस”
“बिल्कुल बिगड़ गया है यह जानवर हो गया है। पता नहीं यह बचपना और जानवरों की आदत कब जाएगी” मेजर शेखर बोले।
इसपर सिमरन ने कहा “आप परेशान ना होइए पापाजी। मैं सब संभाल लूंगी।” “हां बेटा अब बस तेरे पे ही भरोसा है, और तुम राज इसे परेशान नहीं करना। कितनी अच्छी और प्यारी बच्ची है। ख्याल रख इसका, बेचारी कब से कामों में हलकान हो रही है।” यह कह के मेजर शर्मा चले गए दूसरे कामों को देखने।
उनके जाने के बाद सिमरन बोली “How are you feeling now, Sweetheart? All well!”
राज अभी तक सकते में था “मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि अभी-अभी जो इंसान यहां से गए हैं वह सच में मेरे ही पापा है? दो घंटे में उनको मेरे ही खिलाफ कर डाला। तुम क्या चीज हो यार।”
“हम नाचीज़ हैं मेरी जान” सिमरन ने अदा से कहा, तो राज ने कहा “मुझे लग रहा है कि मैंने तुमको प्रपोज करके कहीं गलती तो नहीं कर दी। कुछ घंटे में यह हाल है तो आगे क्या होगा?”
सिमरन ने बनावटी गुस्से से बोला “बुलाओ अभी पापाजी को!” तो राज बोला “अरे बुरा ना मानो क्यूं मुझे जूते खिलवाने पे उतारू हो।” फिर दोनों हंसने लगे और दूसरे कामों में लग गए।
कुछ देर में न्यूटन दौड़ता हुआ आया और बोला “जावेद भाई आ गए! जावेद भाई आ गए!” इसपर रोहित बोला “भाई बारात आ गयी कहते हैं।” न्यूटन बोला “भाई इसको एक्साइटमेंट कहते हैं।”
फिर थोड़ी देर में काज़ी साहब रूबी और जावेद का दोबारा से निकाह पढ़ा रहे थे। निकाह के बाद सबने रूबी और जावेद को मुबारकबाद दी। मुबारकबाद देने वालों में शमशेर खान और मिस्टर शर्मा भी थे। कुछ देर बाद जावेद और रूबी चांडाल चौकड़ी से घिरे हुए थे। वो सब ख़ूब मज़े कर रहे थे। सिमरन भी अब उसी ग्रुप में शमिल हो गई थी।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे