तेरी उल्फत में | इज़हार-ए-मोहब्बत | क़िस्त 05
कुछ देर बाद रूबी को सबने खुशी-खुशी रुखसत किया। कार में बैठने से पहले उसे सबने मुबारकबाद दी। फिर जावेद और रूबी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए आगे बढ़ गए। सब बहुत खुश थे। अगली सुबह मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है कशिश। सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पे शमशेर खान ने कशिश […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
कुछ देर बाद रूबी को सबने खुशी-खुशी रुखसत किया। कार में बैठने से पहले उसे सबने मुबारकबाद दी। फिर जावेद और रूबी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए आगे बढ़ गए। सब बहुत खुश थे।
अगली सुबह
मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है कशिश। सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पे शमशेर खान ने कशिश से कहा।
जी पापा बोलिए “तुम्हारी स्टडी कैसी चल रही है” शमशेर खान ने पूछा।
“अच्छी चल रही है” कशिश ने जवाब दिया
“आगे क्या करना है?” शमशेर खान ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“पापा मुझे क्या करना है, इतना कुछ तो है हमारे पास। बस मुझे तो जिंदगी के मज़े लेने हैं, काम तो सब ज़ैन ही करेगा। आखिर हम दोनों की शादी जो होनी है” कशिश एक रॉ में सब बोलती चली गई।
शमशेर खान कुछ नाराज़ होते हुए बोले “तुमको ज़ैन पसंद है? कशिश बेटा, बचपना छोड़ो, शादी कोई खेल नहीं होती, पूरी जिंदगी का सवाल है। और ज़ैन की कॉलेज की हरकतें देखने के बाद, मैं हज़ार बार सोचूंगा।”
कशिश भी नराज होते हुए बोली “पापा हम दोनों बचपन से साथ खेलते हुए बड़े हुए हैं, आपने पहले कभी भी नहीं कहा ऐसा। उस दो टके के अरसलान और उसके दोस्त के नाटक पर आपको यकीन है। आपने तो उन लोगों को ज़्यादा ही सर चढ़ा रखा है। उनकी औक़ात ही क्या है!”
शमशेर खान गुस्से से बोले “अपनी जबान को संभालो, कशिश, इंसान को पहचानो, मैंने जिंदगी तुमसे ज़्यादा देखी है। वह मुझे वारगला नहीं सकती इतनी आसानी से। अरसलान और उसके दोस्त मेहनती हैं। जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं। मैंने उनको सर पे नहीं चढ़ाया, जो हासिल कर रहे हैं, उनकी मेहनत है। वो उसी कॉलेज में पढ़ते हैं, जहां तुम। कॉलेज की पढ़ाई और साथ में इंटर्नशिप, आसान नहीं होती। उसके बावजूद, उनके रिज़ल्ट और काम की प्रोग्रेस देखो। अगर तुम मेरी बेटी नहीं होती तो शायद आज फाइनल सेमेस्टर में बैठ भी नहीं पाती।”
कशिश गुस्से से उठकर जाने लगी। शमशेर खान ने कहा “जाने से पहले, एक बात सुनती जाओ, अपनी स्टडीज पे ध्यान दो। रोज़ शाम को ज़ैन के साथ घूमना आज से बंद, आप रोज़ कॉलेज के बाद घर आएंगी, यहाँ बाकी काम करके डेली आप अब कम से कम दो घंटे के लिए ऑफिस आएंगी। और ध्यान रहे कि सीडब्ल्यूएस की बिल्डिंग और उसके आस पास भी मुझे ज़ैन आपके साथ नहीं दिखना चाहिए। ज़ैन को कैसे डील करना है, आपका मसला है।”
“पर पापा…” कशिश के कुछ बोलने से पहले, शमशेर खान उठकर खड़े हो गए दरवाजे पर रुकते हुए बोले “कशिश अगर हमने जो कहा है वह आपने नहीं किया तो हमको सख्ती करनी पड़ सकती है।”
अफवाहों का बाजार “गलतफहमियों का शोर और दोस्तों का सहारा”
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे