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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | इज़हार-ए-मोहब्बत | क़िस्त 05

पुलिस वाले और अलविना के साथी वापस चले गए। न्यूटन चुप चाप वहीं बैठा रहा। उसकी आंखें आंसुओं से भरी हुई थी। लैपटॉप न्यूटन की जान था, उसका फाइनल ईयर प्रोजेक्ट था उसमें, जो उसको अगले कुछ दिन में सबमिट करना था, वह घबरा गया। उसकी मेहनत पे पानी फिर गया था। ऊपर से मार […]

Izhaar E Mohabbat

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

पुलिस वाले और अलविना के साथी वापस चले गए। न्यूटन चुप चाप वहीं बैठा रहा। उसकी आंखें आंसुओं से भरी हुई थी। लैपटॉप न्यूटन की जान था, उसका फाइनल ईयर प्रोजेक्ट था उसमें, जो उसको अगले कुछ दिन में सबमिट करना था, वह घबरा गया। उसकी मेहनत पे पानी फिर गया था। ऊपर से मार से वह बेज्जत भी हो गया। वह अपने टूटे हुए लैपटॉप को लेकर हॉस्टल चला गया। अरसलान, ने उसे देखा तो वह घबरा गया।

वह अंदर से बिल्कुल टूटा हुआ था, अरसलान ने जैसे ही उसके कंधे पे हाथ रखा, वह उसके गले लग कर रो पड़ा। रोते हुए बोला “भाई, मैं फेल हो जाऊंगा, मेरा लैपटॉप टूट गया है। मेरा प्रोजेक्ट… ” इतना कहते ही – कहते वह बेहोश हो गया। फेल होने के डर ने उसे अंदर से तोड़ दिया था, ऊपर से बेज्जती जो हुई वह झेलना बड़ी बात थी, किसी भी शरीफ इंसान के लिए।

कुछ देर बाद न्यूटन को कॉलेज के मेडिकल रूम में होश आया, वह अंदर से बुझा हुआ था। अरसलान, रोहित, राज, सना और हिना सब उसके पास थे। सना बोली “न्यूटन क्या हुआ ये, कैसे हुआ!”

न्यूटन ने बूझी-बुझी आवाज में कहा “मैं झील के पास गिर गया था।” वह शर्म से सच नहीं बोल पा रहा था।

“और ये चोटें कैसे लगीं, गिरने की तो नहीं लगती है” हिना ने सवालिया अंदाज से पूछा।

“हां न्यूटन, बता भाई तू, किसने मारा है तुझको, उसकी बैंड बजा दूंगा भाई।” राज ने गुस्से से कहा।

“मुझको किस्मत ने मारा है, मेरी पूरी मेहनत मिट्टी में मिल गई। कुछ दिन में प्रोजेक्ट सबमिट करना है। मैं यहां पलंग तोड़ रहा हूं। और मैं कुछ नहीं बोलना चाहता, बेकार के फसाने बनेंगे फिर से। प्लीज मुझे तन्हा छोड़ दो।” न्यूटन का ऐसा लहजा किसी ने नहीं सुना था आज तक, सब सकते में थे। नर्स ने सुना तो उसने भी सबको जाने को कहा।

सब वहां से निकल के, हॉस्टल रूम में आ गए। हिना बोली “न्यूटन बहुत डिस्टर्ब है। हम लोग अब क्या कर सकते हैं? “रोहित बोला,” यार लैपटॉप उसकी जान था, उसने काफ़ी मेहनत से लिया था। बहुत बुरी तरह से डैमेज हुआ है। लेकिन उम्मीद है। अगर हार्ड-डिस्क नहीं डैमेज हुई तो स्कोप है। बट उसके लिए कल सुबह तक वेट करना पड़ेगा। अगर डाटा मिल गया तो वह हमारे किसी के भी लैपटॉप पे प्रोजेक्ट कंप्लीट कर सकता है। बस हमको उसे थोड़ा सा एक्सटेंशन दिलवाना पड़ेगा।”

“हम लोग कल मिस्टर शर्मा से बात करते हैं।” अरसलान ने राय दी। सबने हामी भरी।

“वो तो सब ठीक है, पर ये बात मुझे खटक रही है कि न्यूटन को किसने मारा, और वह छुपा क्यूं रहा है।” हिना ने संजीदगी से कहा। सब इस बात पे गौर करने लगे हैं।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे