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तेरी उल्फत में | मोहब्बत, गलतफहमियां, और रिश्तों की उलझनें | क़िस्त 09

“मेरा बस चले तो मैं तुमको अभी कार से धक्का दे दूं, पता नहीं पापा ने भी तुमको मेरे सर बांध दिया।” कशिश गुस्से से बोली। अरसलान सिर्फ मुस्कुराता रहा। फिर कॉलेज आ गया। और कशिश ने अरसलान को हॉस्टल के गेट पे ड्रॉप किया और बोली “जल्दी आना, मैं किसी का इंतजार नहीं करती […]

अरसलान और कशिश पुलिस स्टेशन की घटना के बाद | तेरी उल्फत में क़िस्त 09

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

“मेरा बस चले तो मैं तुमको अभी कार से धक्का दे दूं, पता नहीं पापा ने भी तुमको मेरे सर बांध दिया।” कशिश गुस्से से बोली।

अरसलान सिर्फ मुस्कुराता रहा। फिर कॉलेज आ गया। और कशिश ने अरसलान को हॉस्टल के गेट पे ड्रॉप किया और बोली “जल्दी आना, मैं किसी का इंतजार नहीं करती हूं। मेरा काम शायद जल्द ही खत्म हो जाए।”

“आप परेशान ना होइए, मैं इंतजार नहीं करवाऊंगा।” अरसलान ने उतरते हुए कहा।

गुस्से में छुपी हर नाराज़गी का एहसास है,
हर रिश्ते की गहराई में छुपा विश्वास है।
रिश्तों की पेचीदगियां हमें बताती हैं,
कि दिल के करीब रहने वालों से मोहब्बत का पास है।

सीट बेल्ट की कहानी और रिश्तों का सबक

अब कशिश के पास इंतजार करने के अलावा कोई काम नहीं था। उसे कोई काम था ही नहीं। अब वह क्या करती। पर अब इंतजार के अलावा कोई चारा नहीं था। इधर अरसलान को अंदाज़ा था कि कशिश को कोई काम नहीं है, इसलिए वह भी जल्दी से तैयार होने लगा। आधे घंटे बाद कशिश से बर्दाश्त नहीं हुआ, तो उसने अरसलान को फोन किया “अरसलान, मेरा काम हो गया है। अब जरा जल्दी बाहर आओ।”

“ओह, मैं आ रहा हूं। बस पांच मिनट में।” अरसलान ने जवाब दिया।

कुछ देर में अरसलान कार में बैठ गया। कशिश ने कार घर के लिए बढ़ा दी।

थोड़े ही आगे एक पुलिस इंस्पेक्टर ने उनको रोक दिया।

“क्या मुसीबत है, क्यों रोका है?” कशिश ने झल्लाते हुए कहा।

“मैडम गाड़ी से बाहर आइए।” पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा। कशिश बाहर आ गई। साथ में अरसलान भी आ गया।

“आपको पता है मैं कौन हूं। इस तरह आपने मुझे क्यों रोका है।” कशिश गुस्से से बोली।

“आप जो भी हैं, मुझे नहीं मतलब। यह बताइए सीट बेल्ट क्यों नहीं लगाई आपने?” पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा।

कशिश अपनी आदत के मुताबिक सीट बेल्ट लगाना भूल गई थी। पर उसे कभी अपनी गलती माननी तो थी नहीं, वह बोली “हां, तो भूल गए हम, कौन सी बड़ी बात हो गई। तुम जानते नहीं हम कौन है। बहुत पछताओगे, अगर हमको जाने नहीं दिया।”

पुलिस इंस्पेक्टर को गुस्सा आया, वह कुछ बोलता उससे पहले अरसलान बोला “ओह सर गलती हो गई प्लीज माफ कर दीजिए। आगे से कभी ऐसा नहीं होगा।” फिर वह कशिश की तरफ मुखातिब हुआ “कशिश आप सर से माफ़ी मांगिए।”

“तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या, मैं क्यों मांगू माफ़ी। मैं जा रही हूं।” कशिश ने गुस्से से कहा और कार में बैठने लगी।

पुलिस इंस्पेक्टर का गुस्सा अब सातवें आसमान पे था। उसने कार की ‘की’ निकाल ली और बोला “अब आप जरा रुको, अब तो आपको पुलिस स्टेशन लेके जाउंगा। कुछ ज़्यादा ही बदतमीज हो तुम।”

फिर उसने एक लेडी कांस्टेबल को बुलाया। “ज़रा इन मैडम को जीप में डालो, इनको गुस्सा बहुत आ रहा है। हवालात में ठंडा होगा। एक तो रूल तोड़ती हैं फिर इतनी बदतमीजी!”

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे