तेरी उल्फत में | मोहब्बत, गलतफहमियां, और रिश्तों की उलझनें | क़िस्त 09
“ओह, तो आप वहां जो ऊंची आवाज़ में लड़ रही थीं तो ज़ैन के बिना पे। मुझे लगा आप सर का पॉवर दिखा रही हैं।” अरसलान ने कहा। “ओह, पापा कुछ नहीं कहते, वह तो बहुत रूल्स एंड रेगुलेशन मानने वाले हैं। मुझे लगता है तुमने पापा का रेफरेंस दिया होगा उस इंस्पेक्टर को।” कशिश […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
“ओह, तो आप वहां जो ऊंची आवाज़ में लड़ रही थीं तो ज़ैन के बिना पे। मुझे लगा आप सर का पॉवर दिखा रही हैं।” अरसलान ने कहा।
“ओह, पापा कुछ नहीं कहते, वह तो बहुत रूल्स एंड रेगुलेशन मानने वाले हैं। मुझे लगता है तुमने पापा का रेफरेंस दिया होगा उस इंस्पेक्टर को।” कशिश ने अरसलान से पूछा।
“नहीं, मैं उनका ज़िक्र करके उनको परेशान नहीं करना चाहता था। वैसे भी अगर उन्हें पता चलता तो अच्छा नहीं लगता।” अरसलान ने जवाब दिया।
“ओह, तो ऐसा क्या किया तुमने कि इंस्पेक्टर मान गया!” कशिश ने दरियाफ्त किया।
“छोड़िए, बेकार की बातों को” अरसलान ने टाला।
“अरे तुमने हमको आज परेशानी से बचाया है, अगर चाहो तो इसके एवज कुछ मांग भी सकते हो। हम मना नहीं करेंगे।” कशिश ने फिर गुरूर से कहा।
“हम्म, मैंने जो कहा है उसे सुन के आप मेरा खून करना चाहेंगी।” अरसलान ने मुस्कुरा के कहा।
“हमको समझ जाना चाहिए था कि तुम कुछ घटिया ही करोगे।” कशिश गुस्से में आ गई और अरसलान हंसने लगा।
“अरसलान तुम निहायत ही घटिया इंसान हो। क्या कहा है तुमने उन सबसे।” कशिश ने गुस्से से कहा।
“मैंने सिर्फ सच कहा है।” अरसलान ने मासूमियत से कहा।
“क्या सच बोला” कशिश ने फिर कहा।
“यही कि आपको दिमागी बीमारी है, बात – बात पे गुस्से का दौरा पड़ता है। गुस्से में लोगों को मारने दौड़ती है।” अरसलान ने हंसते हुए कहा।
“क्या, तुम्हारी यह हिम्मत। तुमने मुझको पागल बताया वहां। मैं तुम्हारा मुंह तोड़ दूंगी। खून पी जाउंगी तुम्हारा।” कशिश का गुस्सा सातवें आसमान पे था।
“तो क्या करता, आप इतना सब तो कर ही चुकी थी। जो उस वक्त दिमाग में आया, कहा। शुक्र करिए कि बच गई हैं। वरना अभी पुलिस स्टेशन में होती। और जो आप ज़ैन का दम भर रही हैं ना, वह इंस्पेक्टर उसे भी आपके साथ बंद करता।” अरसलान ने इस बार थोड़ा गुस्से से बोला।
“तुम्हारी यह मजाल कि हमसे ऊंची आवाज में बात करो। तुम समझते क्या हो अपने आपको।” कशिश ने गुस्से से कहा।
“ऐसा है कशिश, आप कार रोकिए, मैं वापस जा रहा हूं, सर से कोई बहाना बना लूंगा। मुझे कोई शौक नहीं है आपके यहां आने का। वह तो सर ने कहा था इसलिए ।” अरसलान ने सीरियस होते हुए कहा।
“ड्रामा ना करो अरसलान। तुम्हारी वजह से हमको आज वैसे ही इतना झेलना पड़ा है। अब अगर तुम नहीं आओगे तो बेकार में पापा हमको ही कहेंगे।” कशिश ने कार की स्पीड बढ़ाते हुए कहा।
कशिश और अरसलान की बातों का अंदाज़,
दिल को छू लेती है मोहब्बत की हर आवाज़।
हमने देखा कि इश्क़ के रास्ते पर,
हर कदम पर मिलता है ज़िंदगी का राज़।
जज़्बातों का इम्तिहान
कुछ देर बाद दोनों जन्नत विला के सामने थे। जन्नत विला, शमशेर ख़ान का घर था ।
शमशेर ख़ान लॉन में ही बैठे थे। “खुशामदीद बरखुरदार, अपना ही घर समझो इसे।”
“शुक्रिया सर, आपका बड़प्पन है जो मुझको इस काबिल समझा।” अरसलान ने बैठते हुए कहा।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे