तेरी उल्फत में | मोहब्बत, गलतफहमियां, और रिश्तों की उलझनें | क़िस्त 09
हालात बिगड़ने लगे थे, यह देख अरसलान बोला “भाई प्लीज एक मिनट बात कर लिजिए।” “क्यों, सर को पैसा देगा क्या। जानता नहीं यह कौन है। पैसे देने वालों का तो कीमा बना देते हैं” लेडी कांस्टेबल ने कशिश का हाथ पकड़ते हुए कहा। “मेरा हाथ छोड़ो वरना बहुत पछताओगे, तुम सब।” कशिश ने गुस्से […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
हालात बिगड़ने लगे थे, यह देख अरसलान बोला “भाई प्लीज एक मिनट बात कर लिजिए।”
“क्यों, सर को पैसा देगा क्या। जानता नहीं यह कौन है। पैसे देने वालों का तो कीमा बना देते हैं” लेडी कांस्टेबल ने कशिश का हाथ पकड़ते हुए कहा।
“मेरा हाथ छोड़ो वरना बहुत पछताओगे, तुम सब।” कशिश ने गुस्से से अपना हाथ झटकाते हुए कहा।
“नहीं – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बस प्लीज एक मिनट बात सुन लीजिए।” अरसलान ने बड़े सीरियस अंदाज में कहा।
“क्या है बताओ, जल्दी।” पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा तो अरसलान उन दोनों को कशिश से थोड़ा अलग ले के गया, फिर बोला “सर, बात यह है कि वह लड़की थोड़ी बीमार है। इसको दिमागी बीमारी है। पहले यह ठीक थी पर आजकल इसे गुस्सा बहुत आता है। अगर बात ना मानो तो खुद को नुकसान पहुंचाने लगती है। मैंने इसे कहा था सीट बेल्ट के लिए, पर ज़िद पे आ गई। बोली कि अगर सीट बेल्ट लगायी तो यह कार से कूद जाएगी। ”
“कैसी बात कर रहे हो, मतलब यह पागल है क्या।” पुलिस इंस्पेक्टर ने हैरत से कहा।
“नहीं भाई, बस कभी – कभी एकदम से हाइपर हो जाती है। वैसे नॉर्मल रहती है। लेकिन जब अटैक पड़ता है तो जो हाथ में होता है, मार देती है।” अरसलान ने संजीदगी से कहा।
“तो इसका इलाज करवाओ, खुला क्यों छोड़ रखा है?” लेडी कांस्टेबल ने कहा।
“मैडम, इलाज हो रहा है। काफ़ी सुधार है। वह तो शाम को इसने ज़िद की घूमने जाना है, अब मना करना अच्छा नहीं लगता ना। क्या हुआ कि बीमार है, है तो अपनी फ्रेंड ना। प्लीज माफ कर दीजिए और जाने दीजिए हमको।”
“ठीक है, तुम्हारी परेशानी नहीं बढ़ाना चाहता मैं, वैसे ही क्या कम है तुम्हारी लाइफ में। पर जरा ख्याल रखो इसका।” पुलिस इंस्पेक्टर ने अरसलान के कंधे पे हाथ रखते हुए कहा और कार की ‘की’ उसे दे दी।
“शुक्रिया भाईजान आपका” अरसलान ने मुस्कुराते हुए कहा। फिर वह कशिश के पास पहुंचा। ‘की’ उसे दी और बोला “सीट बेल्ट लगा लो और चलो। वरना ये लोग तुमको आज लेके ही जाएंगे। बहुत मुश्किल से मनाया है।”
कशिश ने भी अरसलान की बात मानना अच्छा समझा। वह पुलिस स्टेशन नहीं जाना चाहती थी। जैसे ही उसने कार स्टार्ट की तो इंस्पेक्टर आया और बोला “इतना गुस्सा करना अच्छा नहीं होता। वह तो अच्छा है कि तुम्हारा दोस्त सुलझा हुआ इंसान है, वरना!”
कशिश कुछ बोलती उससे पहले ही अरसलान बोला “नहीं सर, अब यह दोबारा ऐसा नहीं करेगी। चलो कशिश हमको देर हो रही है।” कशिश ने अरसलान को घूरा और फिर कार आगे बढ़ा दी।
कुछ देर बाद कशिश ने अरसलान से कहा “वैसे तुमने पुलिस इंस्पेक्टर को हैंडल अच्छा किया।”
अरसलान बोला “हम्म, कुछ खास नहीं, बस हो गया।”
“चलो अच्छा ही है, वह इंस्पेक्टर बच गया। हमको तो बस पुलिस लॉकअप में वक़्त गुजारना पड़ता, ज़ैन के आने तक।” कशिश ने घमंड से कहा।
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे