तेरी उल्फत में | मोहब्बत, गलतफहमियां, और रिश्तों की उलझनें | क़िस्त 09
हां साहिल मैं खुद को खत्म कर लूंगी अगर मुझे लगेगा कि आपकी मोहब्बत के बगैर मेरी जिंदगी का कोई वजूद नहीं है। बस यही कहना था मुझे। अलविदा साहिल हमेशा के लिए। हो सके तो कभी अपनी अंजान मोहब्बत को प्यार से याद कर लेना जिंदगी में। बस तुम्हारी यादें अपने साथ ले जा […]

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
हां साहिल मैं खुद को खत्म कर लूंगी अगर मुझे लगेगा कि आपकी मोहब्बत के बगैर मेरी जिंदगी का कोई वजूद नहीं है। बस यही कहना था मुझे। अलविदा साहिल हमेशा के लिए। हो सके तो कभी अपनी अंजान मोहब्बत को प्यार से याद कर लेना जिंदगी में। बस तुम्हारी यादें अपने साथ ले जा रही हूं। अलविदा साहिल अलविदा!” और फोन डिस्कनेक्ट हो गया।
न्यूटन कुछ नहीं कह पाया। अब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह परेशान हो गया। दिल के किसी कोने से वह अब अफसोस महसूस करने लगा। उसने शायद बहुत बड़ी गलती कर दी थी। उसने उस लड़की को कोई मौका ही नहीं दिया। बस अपनी ज़िद पे अड़ा रहा। उसने कई बार उसे फोन करने की कोशिश की पर फोन स्विच ऑफ था। इसी उलझन में वह बिस्तर पर करवटे बदलने लगा। उसे कब नींद आई पता भी नहीं लगा।
ज़िंदगी की राहों में जब उलझनें बढ़ जाती हैं,
मोहब्बत की बातें ही दिल को राहत दिलाती हैं।
मोहब्बत के दीवाने कभी हार नहीं मानते,
यही तो इश्क़ की सबसे बड़ी कहानी सुनाते हैं।