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तेरी उल्फ़त में

तेरी उल्फत में | मोहब्बत, गलतफहमियां, और रिश्तों की उलझनें | क़िस्त 09

दूसरी तरफ से आई इस नाराजगी भरी दलील का न्यूटन के पास कोई जवाब नहीं था, हर कोई उसे यही बात समझाता रहता था पर वह किसी की बात नहीं मानता। आज वही सवाल उस लड़की ने भी पूछ लिया। न्यूटन की चुप्पी पे वह लड़की फिर बोली “साहिल आपको ये हक किसने दिया। आप […]

अरसलान और कशिश पुलिस स्टेशन की घटना के बाद | तेरी उल्फत में क़िस्त 09

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा

दूसरी तरफ से आई इस नाराजगी भरी दलील का न्यूटन के पास कोई जवाब नहीं था, हर कोई उसे यही बात समझाता रहता था पर वह किसी की बात नहीं मानता। आज वही सवाल उस लड़की ने भी पूछ लिया।

न्यूटन की चुप्पी पे वह लड़की फिर बोली “साहिल आपको ये हक किसने दिया। आप में और उस लड़की में क्या फर्क है। उसने आपका दिल तोड़ा। आपने भी तोड़ा ही होगा।”

“नहीं तोड़ा मैंने किसी का दिल। कभी भी नहीं तोड़ा। सुन रही हैं आप। क्या जानती हैं आप मेरे बारे में। मुझ पर तोहमत नहीं लगाइए। मैं जनता हूं दिल टूटता है तो कैसा लगता है। और इसलिए मैं दोबारा किसी को मौका नहीं देना चाहता। ना ही किसी का दिल तोड़ना चाहता हूं। तभी आपसे भी यही कह रहा हूं कि मुझसे दूर रहिए।” न्यूटन अंदर से टूट गया था। कुछ चीखते हुए और गुस्से से बोला उसने। फोन को अलग रख दिया उसने और निराश होकर बैठ गया।

फोन से आवाज आई जा रही थी। “साहिल, साहिल आई एम सॉरी। मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं बस आपको समझाना चाह रही थी। प्लीज़ आंसर करिए।”

कुछ देर बाद न्यूटन ने फोन उठाया। वह लड़की अभी भी लाइन पे थी। न्यूटन बोला “देखिए प्लीज मुझे मेरे हाल पे छोड़ दीजिए। इसके बदले क्या चाहती हैं बता दीजिए।”

“माफ़ी चाहते हैं साहिल, मेरी वजह से आपको इतना दुख हुआ। मैं तो बस…. खैर छोड़िए। मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए। जो चाहिए वह आप दे नहीं सकते।” उस लड़की ने बेज़ारी से कहा।

“मुझे गलत नहीं समझिए। यही हमारे लिए बेहतर है।” न्यूटन ने कहा।

“मेरे लिए क्या बेहतर है क्या नहीं, यह मैं खुद डिसाइड कर सकती हूं साहिल। वैसे मुझे इस फैसले पे बहुत अफसोस रहेगा कि मैंने जिस इंसान से पहली बार मोहब्बत की वह डरपोक निकला।” इस बार लड़की ने थोड़ी ऊंची आवाज़ में कहा।

“क्या कहना चाहती हैं आप?” न्यूटन ने गुस्से से पूछा।

“क्या कहना है साहिल। रह क्या गया, खैर आप यही चाहते हैं कि मैं आपकी लाइफ से चली जाऊं। यही सही। मैं अब आपको परेशान नहीं करूंगी। “लड़की ने बेज़ारी से कहा”

“जी शुक्रिया आपका।” न्यूटन ने थोड़ा नर्म लहजे में कहा।

“शुक्रिया कहने की कोई जरूरी नहीं है। मैं आपकी तरह संगदिल नहीं, जो चाहने वालों की कदर नहीं कर सकती। जा रही हूं आपकी जिंदगी से हमेशा-हमेशा के लिए।” इतना कहकर लड़की ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।

न्यूटन कुछ कह नहीं सका। उसने अपने आप से पूछा कि क्या उसने यह सही किया। उसे पहली बार लगा कि कहीं उससे कोई गलती तो नहीं हुई। इसी उलझन में था कि तभी उसका फोन फिर से रिंग किया। वही अंजान नंबर था। उसने फोन आंसर किया।

वह कुछ बोलता उससे पहले ही लड़की बोली “मैंने सिर्फ आपको यह बताने के लिए दोबारा फोन किया है कि शायद मैं आपकी तरह बहादुरी से ठुकराए जाने का दर्द ना सहन कर सकूं। इसलिए मैं शायद एक गुनाह करूंगी। पर उसके अलावा मेरे पास कोई रास्ता ही नहीं रह जाएगा।

कहानी जारी है, अगले सफ़े पे