तेरी उल्फत में | वह पहली मोहबत की झलक और कामयाबी की पहल!। क़िस्त 03
रूबी की तन्हाई और ख़ामोश दर्द, सिमरन की चंचलता और राज का नया सफ़र। पढ़िए तेरी उल्फ़त में की तीसरी क़िस्त, पहली मोहब्बत की झलक और कामयाबी की पहल।

कहानी गहरी है, हर सफ़ा आपके दिल में उतर जायेगा
फिर सब वहां बैठ गए, उसके बाद शमशेर खान बोले “भाई तुम सब यह न समझना कि तुम लोगो को यह जॉब मैंने दी है, या मेरी वजह से मिली है। मुझे पता था कि तुम लोग यहां जॉब के लिए आए हो, पर मैंने बिल्कुल भी कोई बात नहीं की है इस सिलसिला में। तुम सब अपनी काबिलियत पर यहां हो और यह जॉब उसी काबिलियत पर मिली है आप सबको, मैंने इसमें कुछ भी नहीं किया। और मैं इसलिए बहुत खुश हूं कि आप सबने अपनी मेहनत और टैलेंट की वजह से यह जॉब पाई है, आयम प्राउड ऑफ यू।”
हिना बोली “जी शुक्रिया। हम सब पूरी मेहनत से यहां काम करेंगे, और आपको बिल्कुल भी शिकायत का मौका नहीं देंगे।”
शमशेर खान बोले “मुझे यकीन है कि ऐसा ही होगा। तो फिर आप सब दिए गए टाइम पर ऑफिस में आएं। सिमरन आपको काम की डिटेल्स दे देगी। बाकी मेरी आप से यहां पर कम ही मुलाकात हो पाएगी। क्योंकि मैं यहां इस ऑफिस में ज्यादा नहीं आता, अभी यह ऑफिस शुरू ही हुआ है। बाकी बातें काम करने के साथ ही आप सब सीख लेंगे।”
अरसलान बोला “जी हम सब वक्त पर ऑफिस आ जाएंगे। मोहित सर ने जो यकीन किया है हम पर उसे हम बिल्कुल भी टूटने नहीं देंगे, हम उनकी उम्मीदों पर पूरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।”
शमशेर खान मुस्कुराते हुए बोले “अल्लाह आप सबको कामयाबी दे।”
फिर वो सब शमशेर खान के केबिन से बाहर आ गए। बाहर आ कर रोहित बोला, “आज तो मज़ा ही आ गया, हमारी इतनी अच्छी जॉब लग जाएगी, यह तो सोचा ही नहीं था। चलो भाई आज हम सब मिलकर हमारी इस पहली कामयाबी को सेलिब्रेट करते हैं। मुझे बहुत भूख भी लग रही है, इसी बहाने खाना भी हो जाएगा।”
राज बोला “हां हां क्यों नहीं, आज वाकई जश्न मनाने का दिन है, चलो तुम सब मेरे घर चलो। वहीं पर हम लोग पार्टी करते हैं। इसी बहाने आज अरसलान मेरे पापा से भी मिल लेगा। रूबी आपा को भी कॉल कर दो, वह भी वहीं पहुंच जाएंगी और उनको अभी कुछ भी बताना मत कि किस लिए हम लोग एक साथ मिल रहे हैं। उन्हें हम सरप्राइज देंगे, वह भी यह न्यूज़ सुनकर बहुत खुश हो जाएंगी।”
हिना बोली “ठीक है, वैसे एक बात बताओ, किसके मिलने पर इतना खुश हो तुम, नौकरी के लिए या फिर सिमरन के लिए!” इस पर सब ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे और वो सब राज के घर के लिए चल पड़े।
रूबी की तन्हाई.. रूबी का दर्द..दिल की गहराई मैं एक खामोश गूँज!
राज के घर पर, सब राज के पापा जो कि एक रिटायर्ड आर्मी मैन थे, उनसे मिले और उनको सब कुछ बताया। उनका नाम मेजर शेखर था। मेजर शेखर ने सब दोस्तों को मुबारकबाद दी।
मेजर शेखर अरसलान से बोले “तुम्हारे बारे में राज ने कई बार बताया है। तुमसे मिलने का इंतजार देख रहा था, आज मिल भी लिया। जैसा राज ने कहा था, तुम उससे भी ज्यादा लायक हो बेटा।”
अरसलान बोला “शुक्रिया अंकल, ये सब आपका आशीर्वाद है।”
कहानी जारी है, अगले सफ़े पे